राष्ट्र कोई भूमि का टुकड़ा नहीं होता है

रामकुमार जी। दिनांक 4 जनवरी को दोपहर 1:00 बजे से कान्हा उत्सव वाटिका ठंडी सड़क दतिया में समस्त हिंदू समाज द्वारा एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें टेंऊंराम धर्मशाला से कांहा वाटिका तक कलश यात्रा निकाली गई कलशयात्रा में भारत माता एवं रानी लक्ष्मीबाई की झांकियां सजाई गई तथा भारी संख्या में…

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रामकुमार जी। दिनांक 4 जनवरी को दोपहर 1:00 बजे से कान्हा उत्सव वाटिका ठंडी सड़क दतिया में समस्त हिंदू समाज द्वारा एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया

जिसमें टेंऊंराम धर्मशाला से कांहा वाटिका तक कलश यात्रा निकाली गई कलशयात्रा में भारत माता एवं रानी लक्ष्मीबाई की झांकियां सजाई गई तथा भारी संख्या में मातृशक्ति एवं पुरुष वर्ग सम्मिलित हुए कार्यक्रम का शुभारंभ तुलसी माता पूजन एवं गौ माता पूजन से किया गया तथा राष्ट्रीय साहित्य वितरण का स्टाल भी लगाया गया तथा श्री रतन कुशवाहा जी की भजन मंडली द्वारा

भजनों की प्रस्तुति दी गई मंच पर मातृशक्ति के रूप में उपस्थित श्रीमती कविता समाधिया जीने अपने उद्बबोधन में पंच परिवर्तन के पांचों विषय सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व का बोध, एवं नागरिक शिष्टाचार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि हमें अपने परिवार की भेष – भूसा, भोजन, भजन, एवं भ्रमण इत्यादि गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है

हमें अपनी बहन बेटियों को अच्छे संस्कार देना चाहिए और पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए छुआ-छूत की भावना नहीं रखना चाहिए और अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। श्री राजेश्वरानंद जी पटसारिया महाराज ने भारतीय संस्कृति का वर्णन करते हुए बताया कि हमारी संस्कृति ही हमारा अस्तित्व है क्योंकि संस्कृति मां होती है

विधर्मीयों की प्रेरणा से हमारी संस्कृति को बिगाड़ा जा रहा है सनातन की जड़ हिंदुत्व है हमारे देश में धर्मांतरण का कार्य विभिन्न तरीकों से चल रहा है जिससे हमें जागरुक रहने की आवश्यकता हैमुख्य बक्ता के रूप में श्रीराम कुमार जी शिकरवार (विभाग सह समरसता प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुरैना विभाग) ने अपने बौद्धिक में बताया कि “हिंदू कौन ” यह प्रश्न उठाये जाते हैं हमें इस भ्रम में नहीं पड़ना है नाम बदलते रहते हैं

संस्कृति नहीं बदलती हमारी संस्कृति है कि जो इस धरती को भारत माता मानता है वह हर व्यक्ति हिंदू है लाखों बरसो से जो निवासरत है वह हिंदू है, वसुधैव कुटुंब कम की अवधारणा रखने वाला हर व्यक्ति हिंदू है भारत में मुगलों और अंग्रेजों के वंशज नहीं रहते यहां चाणक्य महाराणा प्रताप विक्रमादित्य आदि के वंशज रहते हैं वे सब हिंदू हैं सारी भाषाओं की जननी संस्कृत है भारत केवल कश्मीर से कन्याकुमारी तक नहीं है

क्योंकि राष्ट्र कोई भूमि का टुकड़ा नहीं होता भूमि का टुकड़ा तो छीना जा सकता है पर संस्कृति नहीं जिसकी संस्कृति जीवित रहती है उसे कोई नहीं मार सकता प्राचीन समय में भारत को सोने की चिड़िया कहा गया उस समय भारत में केवल हिंदू ही रहता था मुगलों ने अंग्रेजो ने भारत पर शासन किया लेकिन वह शासन केवल जमीन पर किया भारतीयों के मन पर कभी नहीं कर सके अंग्रेजो ने हमारी संस्कृति पर कुठाराघात करने के लिए लॉर्ड मैकाले की

शिक्षा पद्धति चलाई भारतीय वस्तुओं को अपमानित किया लोगों में यह भ्रम फैलाया की अंग्रेजी से ही नौकरी लगती है जबकि चीन रूस जापान आदि देशो में उनकी मातृभाषा ही चलती है अंग्रेजी नहीं चलती उन्होंने कहा कि जब तक हिंदुस्तान में एक भी हिंदू जीवित है तब तक इसे हिंदू राष्ट्र कहा जाएगा फारवर्ड पहले

पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत में ही शामिल था तब डॉक्टर हेडगेवार जी द्वारा कहा गया था कि “हां मैं कहता हूं कि भारत हिंदू राष्ट्र है “तथा ग्रीक दार्शनिक के आदमी ढूंढने वाले संस्मरण को सुनाया उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है संघ कहता है कि कोई भी व्यक्ति 100 प्रतिशत अच्छा नहीं होता और 100 प्रतिशत बुरा भी नहीं होता हिंदू समाज जल्दी सोता है संघ उसे जगाने का कार्य कर रहा है

राष्ट्र पर आने वाले संकटों से निपटने के लिए संघ हमेशा तैयार रहता है। संघ की100 वर्ष की यात्रा में बहुत बड़े-बड़े कार्य हुए हैं उन्होंने संघ की 100 बर्ष की यात्रा में होने वाले प्रमुख कार्यों का वर्णन भी किया उन्होंने बताया कि हमें अपने अनादि काल के गौरव को भूलना नहीं चाहिए सामाजिक समरसता हिंदू समाज को संगठित रख सकती है हिंदू समाज में छुआछूत कभी नहीं रही हिंदुओं के पलायन को हमें रोकना है

जनसंख्या के असंतुलन से देश घटा है बटा है और कटा है अंत में उन्होंने कहा कि अगर हिंदू संगठित रहेगा तो भारत पुन: सोने की चिड़िया बनेगा। आशीर्वचन के रुप में श्री धूमेश्वर जी महाराज ने कहा कि वर्ण व्यवस्था केबल घर तक सीमित होना चाहिए घर से बाहर हम सब किसी जाति या समाज के नहीं हैं हम सब हिंदू हैं

महापुरुषों की कोई समाज या जाति नहीं होती वह तो केवल महापुरुष ही होते हैं और महापुरुषों को कोई एक जाति न माने बल्कि सभी समाज को उनकी जयंतियां मनाना चाहिए एकता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि एक लकड़ी तोड़ी जा सकती है

लकडी का गट्ठर नहीं तोड़ा जा सकता इसलिए हम सभी हिंदुओं को संगठित होकर रहना है क्योंकि हिंदू समाज ही संघ की शक्ति है कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ तथा विशाल भंडारे का आयोजन का हुआ जिसमें सभी क्षेत्रवासियों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की ।

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