कमिश्नर साहब के आदेशों की धज्जियां उड़ाती एरोड्रम पुलिस: लसूडिया में लाइन अटैच हुआ संजय बिश्नोई अब यहाँ चला रहा अपनी गुंडागर्दी
अंधेर नगरी समाचार इंदौर।
जिला इंदौर इंदौर पुलिस कमिश्नर का स्पष्ट फरमान है कि थाने की चौखट पर आने वाले हर पीड़ित की सुनवाई हो और उसे न्याय मिले। लेकिन एरोड्रम थाने में इस आदेश को ठेंगे पर रखा जा रहा है। कॉलोनी में हुई हाथापाई और मारपीट की शिकायत लेकर पहुँची पीड़िता पायल गिरी गोस्वामी जब थाने आई, तो मदद करना तो दूर, पुलिस वालों ने उसी के साथ
बदसलूकी और हाथापाई शुरू कर दी। पीड़िता की माँ को अंदर बंद कर दिया गया, शिकायत दर्ज करने से साफ मना कर दिया गया और जब पीड़िता ने सच उजागर करने के लिए वीडियो बनाया, तो उसका मोबाइल छीनने की कोशिश की गई। बेबस महिला को थाने के बाहर छिपकर मदद की गुहार लगानी पड़ रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरी गुंडागर्दी के केंद्र में वही विवादित सब-इंस्पेक्टर संजय बिश्नोई बैठा है, जो कुछ समय पहले लसूडिया थाने में वारंट
तमिल कराने के नाम पर एक नागरिक के घर में जबरन घुसने और दरवाजा तोड़ने के गंभीर मामले में लाइन हाजिर लाइन अटैचहो चुका था। आखिर ऐसे दागी और विवादित रवैये वाले पुलिसकर्मी को बहाल होते ही दोबारा थाना किस हैसियत से सौंप दिया जाता है? जब तक ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ चल रही जांच पूरी न हो जाए, तब तक इन्हें
थानों की कमान देकर जनता पर अत्याचार करने की छूट क्यों दी जा रही है? एरोड्रम पुलिस का यह रवैया सीधे तौर पर खाकी की साख पर बट्टा लगा रहा है, जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सख्त कदम उठाना चाहिए।