1991 के दौर से शुरुआत करने से लेकर आज तक का सफर शुरू किया अजय देवगन ने
शाहपुरा, भीलवाड़ा (राजस्थान)-राजेन्द्र खटीक।
मुंबई/ 1991 में एक लड़का जो फिल्म ‘फूल और कांटे’ से बॉलीवुड में कदम रखता है।न कोई लंबा-चौड़ा डायलॉग…न कोई ओवरड्रामैटिक एंट्री…बस… दो चलती हुई मोटरसाइकिलें… और उन पर खड़ा एक नौजवान।
उस एक सीन ने सिर्फ़ एक फिल्म को नहीं…बल्कि हिंदी सिनेमा को एक नया सुपरस्टार दे दिया।नाम था… अजय देवगन।उस दौर में जब कई सितारे अपनी मुस्कान और डांस से दिल जीत रहे थे…अजय देवगन अपनी खामोशी, तीखी निगाहों और इंटेंस स्क्रीन प्रेजेंस से लोगों के दिलों पर राज कर रहे थे।
उनका चलना…उनका बोलना…उनका गुस्सा…उनकी आंखों की गंभीरता…यह सब सिर्फ़ अभिनय नहीं था…युवाओं के लिए एक एटीट्यूड बन चुका था।90s के दशक में न जाने कितने लड़कों ने उनका हेयरस्टाइल अपनाया…लेदर जैकेट पहननी शुरू की…और उनकी तरह कम बोलकर ज़्यादा असर छोड़ने की कोशिश की।लेकिन असली सवाल आज भी वही है…आख़िर तीन दशक बाद भी अजय देवगन की फैन फॉलोइंग इतनी मज़बूत क्यों है?
शायद इसलिए…क्योंकि उन्होंने कभी खुद को एक ही छवि में कैद नहीं किया।एक तरफ विजयपथ, दिलजले और दिलवाले का गुस्सैल हीरो…दूसरी तरफ इश्क और प्यार तो होना ही था का सादगी भरा रोमांस…फिर ज़ख्म और द लीजेंड ऑफ भगत सिंह जैसी फिल्मों में ऐसा अभिनय, जिसने उन्हें राष्ट्रीय
पुरस्कार दिलाया…और जब बात आई कॉमेडी की, तो गोलमाल, गोलमाल रिटर्न्स, ऑल द बेस्ट और सन ऑफ सरदार जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को खूब हंसाया और दिल जीता। और अभी हाल ही में आई फिल्म धमाल 4 में भी उनका जलवा पूरी तरह कायम है।यानी अजय देवगन ने सिर्फ़ एक ही जॉनर में नहीं…हर जॉनर में अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीता। बाद में सिंघम, दृश्यम, रेड और तान्हाजी जैसी फिल्मों से उन्होंने हर पीढ़ी को अपना दीवाना बना लिया।यही वजह है कि…आज भी जब अजय देवगन स्क्रीन पर आते हैं…तो उनके डायलॉग से पहले ही सिनेमाघर में सन्नाटा छा जाता है। क्योंकि कुछ सितारे सिर्फ़ हिट फिल्में नहीं देते…वे एक एहसास बन जाते हैं।और अजय देवगन…उन्हीं चुनिंदा सितारों में से एक हैं, जिनका 90s वाला क्रेज आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा है।