जीवन में संतोष धारण करने के साथ दया व क्षमा के भाव रखे- आचार्य रामदयालजी महाराज
मर्यादित जीवन जीने वाला इस लोक ओर परलोक दोनों में सुख प्राप्त करता
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग
शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।
भीलवाड़ा/आत्मज्ञान से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है। विचार करें तो लगेगा विराट जगत भी कुछ नहीं है। संसार नाम का कुछ नहीं है हमारा मन ही संसार है। संसार को सब कुछ मान लेना अज्ञानता है। अज्ञान ही जगत है ओर ज्ञान ही भगवान है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्री रामदयाल जी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शील,दया संतोष धन ओर राम भजन की प्यास रखने पर परम प्रकाश की प्राप्ति होती है। जीवन में शील व संयम होना जरूरी है।
संतोष धारण करने के साथ दया व क्षमा के भाव रखे। जिसके पास क्षमा रूपी शस्त्र है वह सबसे महान व्यक्ति होता है। आचार्य श्री ने राम नाम ओर भगवत गीता की महिमा बताते हुए कहा कि भगवत गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। जीवन में भजन के माध्यम से परमात्मा की भक्ति के साथ संयम व संतोष जरूरी है। स्वामी रामचरण जी महाराज कह गए है कि राम के अलावा संसार में कोई सुखी नहीं है। हमे दूसरों की थाली में ज्यादा नजर आने की भावना के कारण हमेशा दूसरा व्यक्ति अपने से अधिक सुखी नजर आता लेकिन संसार में सुखी कोई नहीं है जिसे भी देखो वह दुःखी नजर आता है।
उन्होंने कहा कि सुख माया में नहीं राम में है। मायावी संसार ही दुःख का कारण बनता है। राम ही सुख का ऐसा सागर है जो कभी कम नहीं होता। राम नाम का सुमिरन अनंत सुखों की प्राप्ति कराता है। राम के बताए मार्ग पर चलकर शास्त्र के अनुसार मर्यादित जीवन जीने वाला इस लोक ओर परलोक दोनों में सुख प्राप्ति करता है। चातुर्मास आत्मजागृत होकर परमात्मा की भक्ति का अवसर देता है। इससे पूर्व रामस्नेही सम्प्रदाय के वरिष्ठ संत बड़े साध नरपत रामजी उदयपुर ने भी प्रवचन के माध्यम से धर्म संदेश प्रदान किया।
प्रवचन के विश्राम पर असावा परिवार पथिक नगर भीलवाड़ा के सदस्यों द्वारा आचार्य श्री रामदयाल जी महाराज की आरती की गई। सुमन सोनी एवं मनीष विजयवर्गीय ने भजन की प्रस्तुति दी। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है।
चातुर्मास में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे तक रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।