शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-आजादी के अमृत काल में भी सामाजिक भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका उदाहरण आज शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के बेरी गांव में देखने को मिला। यहाँ लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज के मंदिर पूर्णाहुति कार्यक्रम के दौरान कुछ संकीर्ण मानसिकता के तत्वों द्वारा दलित समुदाय को जुलूस निकालने और सार्वजनिक बावड़ी/तालाब से पानी भरने से रोकने का प्रयास किया गया।
लेकिन, समाज की एकजुटता और प्रशासन की मुस्तैदी ने इन बाधाओं को पार कर समानता का संदेश दिया।क्या है पूरा मामला:बेरी गांव में बाबा रामदेव जी महाराज के नवनिर्मित मंदिर की पूर्णाहुति का कार्यक्रम निर्धारित था। ग्रामीणों के अनुसार, दलित आबादी कम होने के कारण लंबे समय से उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।
इस बार भी ‘बिंदोरी’ और कलश यात्रा को लेकर कुछ लोगों ने विरोध जताया और जुलूस को रोकने की कोशिश की।भीम आर्मी और पुलिस की सुरक्षा में निकली यात्रा:मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने भीम आर्मी से सहयोग मांगा। आज भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में पूरे गांव में भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
यह यात्रा उन मोहल्लों से भी गुजरी जहाँ से पहले अनुमति नहीं दी जा रही थी।संवैधानिक अधिकारों की जीत:इस यात्रा में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और बाबा रामदेव जी के अनुयायी, महिलाएं और छोटे बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। जय भीम और बाबा रामदेव के जयकारों के साथ पूरा गांव गूंज उठा।
भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने कहा कि बाबा साहब का संविधान देश के हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है और किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक मुस्तैदी:शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने इसे अपनी आस्था और संवैधानिक अधिकारों की जीत बताया है।













