Category: लेख
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बिहार चुनाव। जनसुराज में शामिल हुए, कांग्रेसी नेता व वकील संजय मिश्रा
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार इसी कड़ी में जन सुराज पार्टी का आशियाना और भिड़तंत्र लगातार बढ़ाना एक इतिहासिक कदम हैं l जन सुराज के विचारों से प्रभावित होकर कई राजनीतिक पार्टियों के लोग जन सुराज में शामिल हो रहे हैं l इसी कड़ी में मधुबनी जिले के सुप्रसिद्ध वकील व पूर्व कांग्रेस…
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मेहनत और निष्ठा ने दिलाई पदोन्नति, काम या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सदस्यों से पहचानी जाती है कंपनी
इंदौर, 11 अक्टूबर, 2025: एक उत्कृष्ट कंपनी की पहचान सिर्फ उसके काम या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि तब होती है, जब वह अपने साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को लेकर आगे बढ़ती है। उत्तर भारत की अग्रणी पब्लिक रिलेशन्स कंपनी, पीआर 24×7 इसी विश्वास के साथ विकास कर रही है कि कोई संगठन तभी मजबूत…
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लौटना ही होगा; रील से रियल की ओर!
लेख। आज का समय सूचना और तकनीक का समय है। मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को बदल दिया है। पहले लोग सुबह उठकर अख़बार पढ़ते थे,आपस में बैठकर चर्चा करते थे, वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखते थे। गाँव-शहर के चौपाल और मोहल्लों की बैठकों में विचार-विमर्श होता था। उस दौर में रिश्तों का महत्व…
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उपेक्षा की वजह से अपने ही देश में पराया आयुर्वेद ..!!
आज हम उससे बहूत दूर निकल चुके है तथा आज बीमारियों से जकड़े हुए..!! एक समय था जब देशी दवाओं से इलाज होता था और मरीज ठीक भी हो जाते थे जब उस समय इतने कैंसर के मरीज भी नही हुआ करते थे और लोग देशी दवाओं पर भरोसा करते थे लेकिन आज हम उससे…
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सायद ही कोई विभाग ऐसा हो जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो? गरीब हो या मालदार पिस्ते सभी हैं..!!
भ्रष्टाचार की परते,मोटी तनख्वा लेने के बावजूद भी..!! एक आम आदमी हो या बड़ा पैसे वाला आदमी बगैर दिये कुछ काम नही होता यह सायद हर इंसान जानता है!जबकी सरकार ने विभागों में काम करने वालो को अच्छी खासी तनख्वा दी जाती है उसके बाद भी कुछ महकमें रिश्वत को लेकर ही काम करते हैं!…
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राम और रावण~रामलीला का अर्थ और रावण दहन। इस फर्क को भी ठीक से समझ लो!
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार राम और रावण, मृत्यु और जीवन, दोनों विरोध वस्तुत: विरोधी नहीं हैं, सहयोगी हैं। और जिसने ऐसा देखा, उसी ने समझा कि रामलीला का अर्थ क्या है। तब विरोध नाटक रह जाता है। तब भीतर कोई वैमनस्य नहीं है। न तो राम के मन में कोई वैमनस्य है,…
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पचोर। डायरी के पन्नों से डिजिटल स्क्रीन तक: जयेश कोली की क्रिएटिव कहानी बनी सुपरहिट
पचोर, जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश के छोटे कस्बे पचोर में जन्मे जयेश कोली किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं थे, न बड़े शहरों के नेटवर्क थे, न पैसे, न रास्ते। बस एक कॉपी, कुछ अधूरे सपने, और एक ऐसा विश्वास जो बार-बार ठोकर खाने के बाद भी गिरा नहीं। पचोर जैसे छोटे कस्बे से उठकर बड़े प्लेटफ़ॉर्म्स…
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की-पेट फोन यूजर्स भी कर रहे इंटरनेट बैलेंस का भुगतान क्यों ?
टेलीकॉम कंपनी क्या नहीं कर रही आम जनता से बड़ी लूट? नमस्कार। अंधेर नगरी। मोबाइल फोन उपयोग करने वाले सभी उपभोक्ताओं आपको पता होगा कि आज के समय में भारत में 80 प्रतिशत लोग मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं लेकिन इसमें भी 20 प्रतिशत लोग केवल किपेट मोबाइल फोन उपयोग कर रहे हैं।…
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राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुए वंशावली लेखक रामगोपाल भाट।
कबीर मिशन संवाददाता रमेश भाट की रिपोर्ट कैथून ग्राम निवासी धाकड़ समाज के वंशावली लेखक राम गोपाल ब्रह्म भट्ट का देश की राजधानी नई दिल्ली में एनसीआर कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक रामावतार नागर , राष्ट्रीय कवि द्वारा बनाया गया। एनसीआर में पहली बार भगवान धरणी धर के जन्मोत्सव कार्यक्रम में धाकड़ समाज के अधिकारी व…
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सौ साल से ज्यादा राज करने वाले अंग्रेज भी डरते थे इस शख्स से, जो न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर बना था
संवाददाता। की कलम से टंट्या_भील जो न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर बना था। सौ से ज्यादा साल भारत पर राज करने वाले अंग्रेज सबसे ज्यादा किससे डरते थे.? इसका जवाब था वनों में रहने वाले जिनको अनपढ़, गवार कहां जाता था ऐसे जनजाति क्रांति वीरों से !! इसका एक जीता जागता उदाहरण था निमाड़ प्रांत का…
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