लेख

आखिर मृत्यु क्यों आवश्यक है मनुष्य एक-दूसरे पर हावी हो जाते। कैसे? इस कहानी से जानिए ।

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार हर कोई मृत्यु से डरता है, लेकिन जन्म और मृत्यु सृष्टि के नियम हैं। यह ब्रह्मांड के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसके बिना, मनुष्य एक-दूसरे पर हावी हो जाते। कैसे? इस कहानी…

RSS नागपुर में एक छोटे समूह से बढ़कर अब पूरे भारत और वैश्विक स्तर पर सक्रिय- जाने हिस्ट्री

आर एस एस की हिन्दुत्त्व के सौ साल प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण हो गए l समाज में व्याप्त होकर संघ समाज में संस्कार और देश भक्ति का संचार अनंत…

बिहार चुनाव। जनसुराज में शामिल हुए, कांग्रेसी नेता व वकील संजय मिश्रा

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार इसी कड़ी में जन सुराज पार्टी का आशियाना और भिड़तंत्र लगातार बढ़ाना एक इतिहासिक कदम हैं l जन सुराज के विचारों से प्रभावित होकर कई राजनीतिक पार्टियों के लोग जन सुराज में शामिल…

मेहनत और निष्ठा ने दिलाई पदोन्नति, काम या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सदस्यों से पहचानी जाती है कंपनी

इंदौर, 11 अक्टूबर, 2025: एक उत्कृष्ट कंपनी की पहचान सिर्फ उसके काम या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि तब होती है, जब वह अपने साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को लेकर आगे बढ़ती है। उत्तर भारत की अग्रणी पब्लिक रिलेशन्स कंपनी,…

लौटना ही होगा; रील से रियल की ओर!

लेख। आज का समय सूचना और तकनीक का समय है। मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को बदल दिया है। पहले लोग सुबह उठकर अख़बार पढ़ते थे,आपस में बैठकर चर्चा करते थे, वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखते थे। गाँव-शहर के…

उपेक्षा की वजह से अपने ही देश में पराया आयुर्वेद ..!!

आज हम उससे बहूत दूर निकल चुके है तथा आज बीमारियों से जकड़े हुए..!! एक समय था जब देशी दवाओं से इलाज होता था और मरीज ठीक भी हो जाते थे जब उस समय इतने कैंसर के मरीज भी नही…

सायद ही कोई विभाग ऐसा हो जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो? गरीब हो या मालदार पिस्ते सभी हैं..!!

भ्रष्टाचार की परते,मोटी तनख्वा लेने के बावजूद भी..!! एक आम आदमी हो या बड़ा पैसे वाला आदमी बगैर दिये कुछ काम नही होता यह सायद हर इंसान जानता है!जबकी सरकार ने विभागों में काम करने वालो को अच्छी खासी तनख्वा…

राम और रावण~रामलीला का अर्थ और रावण दहन। इस फर्क को भी ठीक से समझ लो!

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार राम और रावण, मृत्यु और जीवन, दोनों विरोध वस्तुत: विरोधी नहीं हैं, सहयोगी हैं। और जिसने ऐसा देखा, उसी ने समझा कि रामलीला का अर्थ क्या है। तब विरोध नाटक रह जाता है।…

पचोर। डायरी के पन्नों से डिजिटल स्क्रीन तक: जयेश कोली की क्रिएटिव कहानी बनी सुपरहिट

पचोर, जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश के छोटे कस्बे पचोर में जन्मे जयेश कोली किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं थे, न बड़े शहरों के नेटवर्क थे, न पैसे, न रास्ते। बस एक कॉपी, कुछ अधूरे सपने, और एक ऐसा विश्वास जो बार-बार…

की-पेट फोन यूजर्स भी कर रहे इंटरनेट बैलेंस का भुगतान क्यों ?

टेलीकॉम कंपनी क्या नहीं कर रही आम जनता से बड़ी लूट? नमस्कार। अंधेर नगरी। मोबाइल फोन उपयोग करने वाले सभी उपभोक्ताओं आपको पता होगा कि आज के समय में भारत में 80 प्रतिशत लोग मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे…