प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
आमतौर पर राजनितिक दल चुनाव के दौरान अपने -अपने घोषणा पत्र के जरिए मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सामजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में अनेक प्रकार के वायदे करते है और यह प्रक्रिया भारतीय गणतंत्र की स्थापना काल से ही जारी है!किन्तु प्राय:यह देखा जाता है कि चुनाव जितने के बाद राजनेता अपने चुनाव घोषणा पत्र में किए वायदे की समीक्षा गंभीरता पुर्वक नहीं करते है! बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग ग्यारह किलोमीटर की दुरी पर राजनगर विधानसभा क्षेत्र है!फिलहाल परिसिमन के बाद यह क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है!कहने को तो इस विधानसभा क्षेत्र में दो प्रखंड और तैतालिस पंचायत आती है!लेकिन अपनी पहचान के लिए यह क्षेत्र काफ़ी लब्बे समय से लडता आ रहा है!हर बार जनता काफ़ी उम्मीदों के साथ प्रतिनिधियों को चुनती है, लेकिन उम्मीद पूरी तरह फीकी पड़ जाति है! महाराजाधिराज रामेश्वर सिंह द्वारा 18 वीं शताब्दी में निर्मित वास्तुकला, स्थापत्य, रंग रोगन, कलाकृति कला से निर्मित नियनाभिराम, राजनगर का राज परिसर देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होता चला जा रहा है!उक्त परिसर के संरक्षण, सम्बर्धन एवं विकास के वास्ते जनहित में पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता है!राज परिवार के नाम पर बसा राजनगर अपनी पहचान प्रतिष्ठा के लिए दशकों से जूझ रहा है!प्रखंड का परिचय लेकर आजादी के बाद से ही यह क्षेत्र पर्यटक क्षेत्र बनने के लिए बेताब है!कई सियासतदान आए है, गए है और कितनों ने वादा किया और तोड़ा भी!लेकिन कोसी -कमला की गोद में अपेक्षा और उपेक्षा के बीच झूलते राजनगर विधानसभा क्षेत्र की किस्मत वहीं की वहीं है!ऐसा कोई भी नेता आज तक नजर नहीं आया कि इस क्षेत्र का समुचित विकास कर सके तथा समस्याओ को सदन में रख सके!
बताते चले कि राजनगर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मानचित्र पर पर्यटन और पिकनिक स्थल के रूप में विकसित एवं विख्यात हो सकता है!प्रकृति की खूबसूरत वादियों में बसा पर्यटकीय दृष्टि से सुंदर, शांत, पवित्र, मंदिरों से घिरा स्थल राजनगर का राज पैलेस है!राज पैलेस वाकई अपनी ऐतिहासिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाली हमेशा दिल वालो की रही है!फिर चाहे वह आदिकाल की बात हो या आज की!वे विरले दिलवाले ही थे, जिन्होंने इस पैलेस को ऐसी ऐतिहासिक ईमारते, स्मारक, मंदिर आदि धरोहर सौगात के रूप में दी!जो पर्यटन इतिहास को अमर बनाती है!
इस पैलेस के मंदिर की बनावट में वास्तुशिल्प की दृष्टि से आंतरिक समानता ही अधिक देखने को मिलती है!इस परिसर में शिव की छाती पर पग धरे माँ काली की अत्यंत मनोहारी प्रतिमा विराजमान है!माँ काली मंदिर की छत का आंतरिक अलंकार न सिर्फ सौंदर्य के लिहाज से बल्कि तांत्रिक महत्व के लिए भी उल्लेखनीय है!इसके अलावे माँ दुर्गा मंदिर, नौलखा, कामाख्या मंदिर, पोखरा के सामने हनुमान मंदिर, राधा कृष्णा मंदिर, गिरजा मंदिर, शिव मंदिर तथा पत्थर से बना चार हाथियों के ऊपर महल भी अपने आप में एक मिशाल हैl राज परिसर से एक किलोमीटर की दूरी पर बाबा भूतनाथ की अति आकर्षक प्राचीन मंदिर बिधमान हैं, जहाँ प्रत्येक दिन काफ़ी संख्या में श्रदालू दर्शन करने आते हैं l
राजनगर राज पैलेस के सभी महत्वपूर्ण मंदिर एवं स्थलों का सभ्यक विकास और उचित रख रखाव नहीं होने के कारण ये स्थल न तो आदर्श और पिकनिक स्थल के रूप में स्थापित हो पा रहा है और न ही विख्यात! जबकि इन स्थलों में पिकनिक और पर्यटन स्थल बनने की असीम संभावनाएं है!
मै प्रदीप कुमार नायक, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार इससे पूर्व अनेकों बार प्रमुखता से इस खबर को अदभूतकारी है राज पैलेस,राजनगर में पर्यटन की स्थिति एवं संभावनाएं, राजनगर में पर्यटन की असीम संभावनाएं, आखिर राजनगर को पर्यटन स्थल का दर्जा कब मिलेगा? शीर्षक के नाम से कई पत्र – पत्रिका एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित किए थे!जिसका आशातीत सफलता मिलती अभी तक नहीं दिख रही है!
जहाँ एक ओर सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से करोड़ो -अरबों रूपये पानी की तरह बहाये जा रहें है!लेकिन अब तक इस धरोहर को सहेजने के लिए सरकार, पर्यटन विभाग या स्थानीय नेता ने माकुल कदम नहीं उठाए है!साथ ही जन प्रतिनिधियों का भी पावन कर्तव्य बनता है कि वे इस मुद्दे पर गहनता पूर्वक विचार करें! ताकि जिले में एक मात्र दर्शनीय स्थल राजनगर राज पैलेस को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग रखें!
यह भी बताना यहां आवश्यक है कि राजनगर में प्रधानमंत्री ऐ. के. गुजराल के कार्यकाल में 02 अक्टूबर 1997 में तत्कालीन केन्द्रीय कृषि मंत्री चतुरानन मिश्र एवं तत्कालीन राज्यपाल महमहिम डॉ. ऐ. आर. किदवई ने कृषि महाविधालय की आधारशीला रखी थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका!ज्ञात हो कि वर्ष 2003 में तत्कालीन केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राजनगर के राटी में एफ. एम. रेडियों प्रसारण केंद्र का शिलान्यास किया था!इसकी स्थापना के लिए राधा कृष्ण ट्रस्ट के जमीन का चयन कर वहाँ जल्द ही निर्माण प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए तत्कालीन अपर समाहर्ता, मधुबनी ने अपने पत्र 1394/05 के द्वारा नगर परिषद मधुबनी एवं अंचलाधिकारी, राजनगर को इसकी स्थापना के लिए कार्य पालक अभियंता को भी पत्र लिखा!इस जमीन के लिए अधिग्रहण और स्थापना में आवश्यक पहलुओं की जानकारी सूचना एवं प्रसारण विभाग को दी गई!परन्तु अब तक इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका!यहां एक महिला महाविधालय खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी जो अब तक ठंडे वास्ते में है!
राजनगर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन एक हजार से ज़्यादा यात्री टिकट कटाकर यात्रा करते है, इससे रेलवे को प्रतिदिन करीब डेढ़ से दो लाख रूपये की आय हो रही है!किन्तु पुरे रेलवे परिसर में सिर्फ एक चापाकल है!जहाँ दिनभर पेयजल के लिए यात्रियों की भीड़ लगी रहती है!खासकर ट्रेनों के आगमन पर यात्री इस गर्मी में वाटर बोतल लेकर चापाकल पर दौड़ पड़ते है!जबकि जलापूर्ति करीब 25 साल से बन्द है!रेलवे ने उसे चालू करने का कोई प्रयास अभी तक नहीं किया है!रेलवे स्टेशन का टेलीफ़ोन नंबर भी ख़राब पड़ा है!यहाँ टेलीफोन द्वारा सूचना देने की व्यवस्था भी नहीं है!स्टेशन परिसर में न तो प्रयाप्त शेड है न चापाकल!फलत :यात्रियों को इस गर्मी में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है! इस रेल खंड में रेल गाड़ियों की संख्या काफ़ी कम होने के बावजूद यहाँ से रेलवे को अच्छी आय होती है!यह रेलवे नेपाल से सटे होने के कारण और लौकहा, लदनिया, लौकही, बाबूबरही, खुटौना,फूलपरास जैसे क्षेत्रों का एक मात्र रेलवे स्टेशन भी राजनगर ही है!यहां पर एक एस. एस. वी. कैम्प भी है, जो राजनगर स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर है!
यहां पर सभी महत्वपूर्ण रेल गाड़ियों की ठहराव के लिए कई बार प्रयास किया गया, जो अबतक अधूरा ही है! रेल विभाग के अनदेखी के कारण इस रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है!अमान परिवर्तन के क्रम में नयी रेल पटरी बिछाये जाने के बाद प्लेटफार्म की चौडाई और ऊचाई काफ़ी कम हो गई है!जिसके कारण प्लेटफार्म पर यात्रियों को ट्रैन में चढने और उतरने में काफ़ी दिक्क़त होती है!कभी -कभी तो यात्री ट्रैन से गिर कर दुर्घटना के शिकार हो जाते है! ट्रैन के आने के बाद ट्रेन से उतरने वाले तथा चढने वाले यात्रियों के बीच टकराने की नौबत आम बात हो गई है!इस क्रम में कई यात्री ट्रेन पर सवार होने से वंचित हो जाते है!यहाँ का प्रतीक्षालय भवन भी काफ़ी छोटा है जहाँ पंखे की व्यवस्था भी प्रयाप्त नहीं है!इस परिसर में सफाई का भी घोर अभाव देखा जा सकता है!रेलवे के कई भूमि अतिक्रमण का शिकार होकर रह गया है!कई लोगों ने रेलवे के भूमि में जबरदस्ती दुकान खोल लिया है, जहाँ सड़क पर यात्रिओ को आने जाने में भी काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं l
पब्लिक लाइब्रेरी के प्रांगण में सेवा समाज नाट्य कला परिषद के नाम से यह संस्था वर्षो से चलती आ रही है! पब्लिक लाइब्रेरी राजनगर के व्यवस्था, पारदर्शिता, उद्देश्य और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहें हैं l साथ ही इसके प्रांगण में शादी – विवाह के नाम पर मस्ती, अश्लीलता और कानून की अनदेखी भी होते आया हैं l आरोप हैं कि इसमें भी लाखो -करोड़ों की लूट -खसोट हुई है, जो जांच का बिषय बनता है!
क्षेत्र के बाजार की रौनक पर अतिक्रमण की समस्या एक धब्बा सा बनकर रह गया है!बाजार में सड़क व सार्वजनिक स्थलों के अतिक्रमण की समस्या का समाधान कम होता नजर नहीं आ रहा है!बाजार के सम्पूर्ण हिस्से में दुकानदार व फुटपाथी विक्रेताओं द्वारा अतिक्रमण की समस्या को दूर करने की दिशा में पंचायत प्रतिनिधि व प्रशासन उदासीन हो रहा है!जिससे बाजार में सड़क जाम जैसी समस्या नासूर बनकर रह गई है!बाजार के गाँधी चौक, बाजार, चट्टीरोड, सुभाष चौक पर सुबह से लेकर देर शाम तक सड़क किनारे सब्जी, फल, एवं अन्य सामग्री विक्रेताओं का अतिक्रमण देखा जा सकता है!सबसे दयनीय स्थिति चट्टीरोड स्थित सुभाष चौक पर देखने को मिल सकता है, जहाँ दुकानदारों द्वारा सड़क पर ही अतिक्रमण कर सामान रखे जाते है!सड़क अतिक्रमण के कारण यहाँ पैदल आवाजाही में भी परेशानी होती है!स्थानीय दुकानदारों द्वारा सड़क पर अबैध रूपसे बांस, बल्ले, शेड व दुकान की सामग्री रख दिए जाने के कारण यह चौराहा काफ़ी संकीर्ण हो गया है!
बाजार क्षेत्र के स्टेशन रोड, मछट्टाचौक, भट्टीचौक, चांदनी चौक, बाजार, गंज, चट्टीरोड, गाँधीचौक, नेहरूचौक सहित अन्य चौराहो पर दुकानदारों का अतिक्रमण कई समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है!यहाँ लगने वाले भयंकर जाम में लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है!
यहाँ यह भी बताना आवश्यक है की जन वितरण प्रणाली के द्वारा मिलनेवाली राशन की अबैध तरीके से सप्लाई दिन के उजाले से लेकर रात के अँधेरे में मेन रोड, मिर्जापुर,बाजार, सिमरी रोड़ और महंतपट्टी के अतिरिक्त अन्यत्र स्थानों पर सड़क अतिक्रमण कर खुलेआम सड़क पर ही ट्रक द्वारा होती हैl
विगत वर्ष से क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान के मद्देनज़र प्रशासनिक अधिकारी विफल साबित हो रहें है!दिन प्रतिदिन दुकानदारों द्वारा सड़क का अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है!इन दिनों लगभग 5 से 20 फिट तक सड़क की जमीन में दुकाने सज रही है!तक़रीबन सभी सड़को की चौडाई कम हो रही है!
स्थानीय प्रशासन व परिवहन विभाग की वाहन चालकों के प्रति सहानुभूति कहे या क्षेत्र के लोगों के प्रति कोई सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं!ज़ब जिस गली में चाहे बड़े वाहन को आप ले जा सकते है!फिर चाहे वो बाजार की तंग गली हो या व्यस्त चट्टीरोड या गाँधीचौक! आलम यह है की बाजार के गलियों में न सिर्फ बड़े वाहनों का प्रवेश होता है!बल्कि इन वाहनों पर ख़तरनाक तरीके से सामान लदें होते है!इससे कभी भी भयानक हादसा हो सकता है!लेकिन इससे स्थानीय प्रशासन को कोई लेनादेना नहीं है!
पांच साल तक ऐश करने वाले राजनेता की टोली जन संपर्क के लिए सिर्फ चुनाव के समय ही क्यों निकलती है? नेता आम जनों की भलाई के लिए क्या करते है ? कुछ करते है तो सिर्फ अपनी भलाई के लिए!ऐसे में किसका भला होगा ? लगता है कि हमारी नीति और नियति नेताओं में अलख जगाने में नाकाम रहें हैं? जो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के जनता से किए वायदे पर खड़े नहीं उतरते उनके मुँह से सत्य और अहिंसा जैसे शब्द बोलना शोभा नहीं देता!
जहाँ तक केन्द्र एवं राज्य सरकार का भ्रष्टाचार पर शिकांजा कसने के लिए निगरानी अंवेषण व्यूरो की सक्रियता बढ़ाने का सवाल है!उसमें शंका की कोई गुंजाईश नहीं है!लेकिन इस विधानसभा के पंचायतों में निगरानी व्यूरों को अब तक कोई बड़ी सफलता मिली हो, ऐसा कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं हैं l














