धार। जयस संगठन कुक्षी के द्वारा क्रांति सूर्य भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालें यात्रा के दौरान 15 नवंबर जन्म 1875 आदिवासी परिवार उलिहातु गांव में हुआ बिरसा मुंडा जी ने आदिवासियों की संस्कृति धरोहर जल, जंगल ,जमीन रक्षा की अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान आंदोलन का ऐलान किया उसे उलगुलान में अंग्रेजों को अपने देश वापस जाओ का नारा दिया बिरसा मुंडा ने नारी की रक्षा कि उन्होंने अपनी लड़ाई तीर कमान से लड़ी है
बिरसा मुंडा जी के कहीं झूठे मुकदमे बने हैं फिर भी वह हार नहीं माने उनका संघर्ष हमेशा आखिरी पंक्ति में खड़े समाज के लिए हमेशा लड़ाई लड़ते रहे अभवा दिशु अभवा राज भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई लड़ने वाले महानायक बिरसा मुंडा के कहीं संघर्षों पर विचार हुआ है 15 नवंबर से 20 नवंबर तक भगवान क्रांति सूर्य बिरसा मुंडा की सांझी विरासत यात्रा का विजय स्तंभ चौराहे पर स्वागत किया गया
और यात्रा वहां से पैदल गायत्री मंदिर तक पहुंची और वहां से बड़वानी की ओर प्रस्थान की 15 दिसंबर को धरती आबा क्रांति सूर्य भगवान बिरसा मुंडा की भूमि पर रांची में समापन होगी यात्रा के संयोजक -प्रोफ.प्रदीप आरबी, प्रमोद नामदेव, चंद्रेश अहिरवार, सुरेंद्र कुमार, पुष्पेंद्र राजपूत, प्रियंका, नेहा कुल्हारे, दिशा यादव, भारत चौहान आदि साथियों काजयस संगठन ने कुक्षी में यात्रा का स्वागत किया.
उसमें उपस्थित अंतिम मुजाल्दा जयस प्रदेश अध्यक्ष, गेंदालाल रणदा जयस महासचिव, सुखलाल रणदा, जितेंद्र एसके रविंद्र मंडलोई रमेश मंडलोई, फिरोज जी, मंसूरी, गब्बर भाई, शिवा मांडवी ,तूफान निंगवाल, रवि सोलंकी, मोहन बडोले, आकाश सोलंकी धर्मेंद्र मंडलोई, बंटी मोरी, जितेंद्र खरते, सुखराम टैगोर व अन्य जयस युवाओं ने भव्य स्वागत किया गया कार्यक्रम का आभार अंतिम मुजाल्दा जी ने माना है









