जेंडर आधारित लिंग जाँच एवं गिरते शिशु लिंगानुपात पर जिलेभर की आशा

सहयोगिनियों की क्षमतावर्धन कार्यशाला सम्पन्न लिंग परीक्षण के समर्थन नहीं करने का लिया सामूहिक संकल्प।दतिया। जेंडर आधारित लिंग जाँच एवं जन्म के समय लगातार गिरते शिशु लिंगानुपात की गंभीर समस्या को लेकर जिलेभर की आशा सहयोगिनी (आशा फेसिलिटेटर) की एक दिवसीय क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला स्वास्थ्य समिति के निर्देशन में…

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सहयोगिनियों की क्षमतावर्धन कार्यशाला सम्पन्न लिंग परीक्षण के समर्थन नहीं करने का लिया सामूहिक संकल्प।दतिया।

जेंडर आधारित लिंग जाँच एवं जन्म के समय लगातार गिरते शिशु लिंगानुपात की गंभीर समस्या को लेकर जिलेभर की आशा सहयोगिनी (आशा फेसिलिटेटर) की एक दिवसीय क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला स्वास्थ्य समिति के निर्देशन में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के गर्ल्स काउंट कार्यक्रम तथा स्वदेश ग्रामोत्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में होटल तान्या पैलेस, दतिया में

आयोजित हुई।कार्यशाला में उनाव, भांडेर एवं सेवढ़ा विकासखंड की आशा *सहयोगिनियों ने सक्रिय सहभागिता की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य जेंडर आधारित भेदभाव, अवैध लिंग परीक्षण, तथा गिरते शिशु लिंगानुपात के सामाजिक, कानूनी एवं स्वास्थ्यगत पहलुओं पर विस्तार से चर्चा कर जमीनी स्तर पर जागरूकता कोर

अधिक सशक्त बनाना रहा।कार्यशाला के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.के. वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिशु लिंगानुपात को सुधारने में आशा सहयोगिनी एवं आशा,कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर तक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक चेतना का संदेश पहुंचाती हैं,

ऐसे में यदि वे लिंग समानता और बेटी बचाने के संदेश को मजबूती से आगे बढ़ाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।कार्यक्रम में नोडल अधिकारी, पीसीपीएनडीटी डॉ. डी.के. सोनी ने जिले की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि समय-समय पर जागरूकता गतिविधियों का आयोजन कर आमजन को पीसीपीएनडीटी अधिनियम की जानकारी देना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लिंग परीक्षण कानूनन अपराध है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।कार्यशाला के द्वितीय सत्र में यूएनएफपीए के कंसलटेंट अनुराग सोनवाकर ने जेंडर आधारित लिंग जाँच, सामाजिक मानसिकता तथा गिरते शिशु लिंगानुपात के दीर्घकालिक दुष्परिणामों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं गर्ल्स काउंट के *नेशनल कोऑर्डिनेटर मुहम्मद रिजवान परवेज ने

पीसीपीएनडीटी एक्ट एवं एमटीपी एक्ट के प्रमुख प्रावधानों, दंडात्मक प्रावधानों तथा उनकी व्यवहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जयपुर से आमंत्रित रिसोर्स पर्सन कल्पना गुप्ता ने क्षेत्रीय अनुभवों के माध्यम से बताया कि सामाजिक संवाद, सही परामर्श एवं परिवार स्तर पर समझाइश से लिंग भेदभाव की सोच को बदला जा सकता है।

गर्ल्स काउंट की सुरभि शर्मा ने जेंडर की अवधारणा, समानता एवं प्रभावी परामर्श की तकनीकी जानकारियां साझा कीं। कार्यक्रम की शुरुआत स्वदेश ग्रामोत्थान समिति के सचिव पीयूष राय के स्वागत उद्बोधन से हुई। गर्ल्स काउंट के दीपेश कपूर ने कार्यक्रम प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला_ के उद्देश्य एवं गतिविधियों की जानकारी दी।

कार्यशाला का प्रभावी संचालन रामजीशरण राय द्वारा किया गया, जिन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के उदाहरण प्रस्तुत कर विषय को और अधिक व्यावहारिक बनाया।कार्यक्रम के अंत में सभी आशा सहयोगिनियों एवं प्रतिभागियों को रामजीशरण राय द्वारा सामूहिक शपथ दिलाई गई, जिसमें सभी ने लिंग परीक्षण का समर्थन *नहीं करने तथा समाज में बेटियों के सम्मान एवं संरक्षण के लिए सतत प्रयास करने का संकल्प लिया।

समापन अवसर पर अशोक कुमार शाक्य ने सभी अतिथियों, रिसोर्स पर्सन एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उक्त जानकारी स्वदेश ग्रामोत्थान समिति के बलवीर पांचाल द्वारा दी गई, जिन्होंने आगामी कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की। कार्यशाला को प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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