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शाहपुरा के गौरव परेश कुमार शर्मा की पुस्तक फुटप्रिंट्स इन दी फॉरेस्टस’ का भव्य लोकार्पण,

वरिष्ठ IAS अधिकारियों ने की मुक्तकंठ से सराहना वन सेवा के अनुभवों को शब्दों में पिरोया, शर्मा की पुस्तक बनी प्रेरणा शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-शाहपुरा की धरती पर जन्मे सेवानिवृत्त वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी परेश कुमार शर्मा ने अपनी आत्मकथात्मक पुस्तक “Footprints in the Forests” लिखकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे शाहपुरा…

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वरिष्ठ IAS अधिकारियों ने की मुक्तकंठ से सराहना

वन सेवा के अनुभवों को शब्दों में पिरोया, शर्मा की पुस्तक बनी प्रेरणा

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-शाहपुरा की धरती पर जन्मे सेवानिवृत्त वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी परेश कुमार शर्मा ने अपनी आत्मकथात्मक पुस्तक “Footprints in the Forests” लिखकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे शाहपुरा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। हाल ही में हैदराबाद के बेगमपेट स्थित IAS एसोसिएशन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की उपस्थिति में इस पुस्तक का लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों एवं विद्वानों ने पुस्तक की मुक्त कंठ से सराहना की।यह पुस्तक श्री शर्मा के लगभग चार दशकों के भारतीय वन सेवा के अनुभवों, संघर्षों, प्रशासनिक कार्यशैली, वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण का सजीव दस्तावेज़ है।

इसमें उनके विद्यार्थी जीवन से लेकर भारतीय वन सेवा में 36 वर्षों से अधिक के लंबे और प्रेरणादायक सफर का विस्तृत वर्णन किया गया है।सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रियदर्शी दाश ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए लिखा है कि परेश कुमार शर्मा की पहचान उनकी साफगोई और निडरता है। उन्होंने पुस्तक को एक उत्कृष्ट संस्मरण बताते हुए कहा कि लेखक एक बेहतरीन कथाकार, ईमानदार अधिकारी, संवेदनशील प्रशासक और प्रकृति प्रेमी के रूप में सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भावी अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीपद भालेराव ने कहा कि यह संस्मरण आंध्र प्रदेश के वन विभाग के कार्यों, चुनौतियों और सुधारों का अत्यंत ईमानदार दस्तावेज़ है। लेखक ने जंगलों की तस्करी, अतिक्रमण, वन संरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का अत्यंत तथ्यात्मक एवं विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।

उनके अनुसार यह पुस्तक प्रत्येक वन अधिकारी के लिए अवश्य पढ़ने योग्य है। पूर्व विशेष मुख्य सचिव, तेलंगाना एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बी. पी. आचार्य ने पुस्तक को पर्यावरण प्रेमियों, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक लोगों तथा वन एवं सिविल सेवा में आने वाले युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशकों के अनुभवों को सरल एवं रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी समीक्षा में लिखा है कि यह पुस्तक केवल एक अधिकारी की आत्मकथा नहीं, बल्कि संघर्ष, ईमानदारी और समर्पण की प्रेरक गाथा है। इसमें आदिलाबाद, करीमनगर, वारंगल और खम्मम जैसे वन क्षेत्रों में कार्य करते हुए वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों तथा बाद में सूचना प्रौद्योगिकी, जियोमैटिक्स और वन आवरण परिवर्तन मानचित्रण जैसे क्षेत्रों में दिए गए उनके उल्लेखनीय योगदान का विस्तृत वर्णन है।

पुस्तक यह भी दर्शाती है कि राजस्थान के अपेक्षाकृत वनविहीन छोटे शहर शाहपुरा से निकलकर एक युवा किस प्रकार अपने परिश्रम, ईमानदारी और लगन के बल पर भारतीय वन सेवा में उच्च स्थान प्राप्त करता है और देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित करता है।

शाहपुरा के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि यहां के सुपुत्र परेश कुमार शर्मा ने अपनी उपलब्धियों और साहित्यिक योगदान से नगर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

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