हिंदवी स्वराज दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर भरतगढ़ पर हुआ आयोजनदतिया। हिंदवी स्वराज का अर्थ भारतीय लोगों का अपना शासन। इस ऐतिहासिक अवधारणा की नींव 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने विदेशी आक्रांताओं के दमन से भारतवर्ष को मुक्त कराने और हिन्दू संस्कृति की रक्षा के लिए की थी। हिन्द स्वराज का मुख्य लक्ष्य भारतीय उप महादीप को-विदेशी सैन्य और राजनीतिक सत्ता से मुक्त कराना और धर्म की रक्षा करना था।
इसमें आम जनता और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी यह विचार दतिया महाराजा अरुणादित्य देव सिंह जूदेव ने शनिवार को हिंदवी स्वराज दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर भरतगढ़ में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं का रुझान पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहा है, हमें युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने पर जोर देना चाहिए। कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में सुरेश श्रीवास्तव ने संबोधित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कपिल तांबे, वरिष्ठ पत्रकार रवि ठाकुर, रामकुमार त्यागी, विद्यालय के आचार्य गण उपस्थित रहे।















