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बिहार चुनाव : 18 वीं विधानसभा में कितने विधायक दागी होंगे?

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार बिहार विधानसभा में गठित होने वाली 18 वीं विधानसभा में कितने जन प्रतिनिधि दागी और सबसे धनी होंगे, यह कहना बड़ा मुश्किल हैँ। पिछले साल 2000 में 17वीं विधानसभा चुनाव में जीत कर आने वाले जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि चौकाने वाली थी। इस विधानसभा में जितने वाले 243 विधायको…

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प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार बिहार विधानसभा में गठित होने वाली 18 वीं विधानसभा में कितने जन प्रतिनिधि दागी और सबसे धनी होंगे, यह कहना बड़ा मुश्किल हैँ। पिछले साल 2000 में 17वीं विधानसभा चुनाव में जीत कर आने वाले जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि चौकाने वाली थी।

इस विधानसभा में जितने वाले 243 विधायको में 163 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैँ। यह संख्या 65 फीसदी हैँ, जो कि 2015 के विधानसभा चुनाव से 10 फीसदी अधिक हैँ। निर्वाचित विधायकों में 123 पर गंभीर किस्म के आपराधिक मामले दर्ज हैँ। जिनको पांच साल की सजा से लेकर अन्य दंड मिल सकती हैँ । 2015 के विधानसभा चुनाव से 2000 के चुनाव के गंभीर किस्म के आपराधिक मामले वाले 11 फीसदी अधिक निर्वाचित हुए थे ।

बिहार इलेक्शन वाच और ए डी आर द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव 2000 में निर्वाचित प्रतिनिधियों ने शपथ पत्रों का विश्लेषण जारी किया था। बिहार इलेक्शन वाच के समन्वयक राजीव कुमार ने कहाँ था कि निर्वाचित होने वाले 19 विधायकों ने अपने शपथ पत्र में हत्या जैसे आरोपों की जानकारी दी थी, जबकि 31 विधायकों पर हत्या के प्रयास के आरोप हैँ।

आठ विधायकों पर महिला हिंसा के आरोप हैँ। उन्होंने बताया था कि दलवार आपराधिक मामले वाले विधायकों देखा जाय तो, 75 में से 54 विधायक राजद के हैँ। जबकि भाजपा के निर्वाचित होनेवाले 74 विधायकों में 47 पर आपराधिक मामले दर्ज हैँ। जदयू के 43 विधायकों में 20 पर तो कांग्रेस के 19 विधायकों में 16 पर आपराधिक मामले दर्ज हैँ । माले के 12 विधायकों में 10 पर तो एआइएमआइएम के पांचो विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैँ ।

17 वीं विधानसभा में निर्वाचित होने वाले 243 विधायकों में 194 विधायक करोड़पति हैँ। इसके पूर्व 2015 के चुनाव में 162 करोड़पति विधायक चुने गए थे l निर्वाचित विधायकों में भाजपा के 73 में से 65 विधायक, राजद के 74 में से 64 विधायक, जदयू के निर्वाचित 43 में से 38 विधायकऔर कांग्रेस के निर्वाचित 19 में से 14 विधायक करोड़पति हैँ । पांच करोड़ से अधिक सम्पति वाले 61 विधायक तो दो करोड़ से पांच करोड़ की सम्पति वाले 87 विधायक, जबकि दो करोड़ से अधिक सम्पति वाले 72 विधायक निर्वाचित हुए थे।

उक्त विधानसभा के लिए निर्वाचित होने वाले विधायकों की औसत सम्पति 4.32 करोड़ हैँ । सच्चाई यह हैँ कि भारत सरकार के कुछ मंत्री अपने निजी यात्रा भी अपने अधिकारों का दुरूपयोग करके सेना के विमान से यात्रा कर लेते हैँ । अनावश्यक निजी सुरक्षा के नाम पर भारी भरकम ब्लैक कैट कमांडो और अन्य सुरक्षा का दुरूपयोग करते हैँ। जिनसे पूरा देश डरता हैँ । उनको भी सुरक्षा जनता के पैसों पर करना होता हैँ ।

गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेता सर्वदा याद किए जाते रहेंगे। लेकिन आज के नेताओं को जो पैसे के बल पर चुनाव जीते हैँ,और जीतते हैँ, उन्हें कौन याद रखता हैँ। क्या आम जन मानस में उन नेताओं के प्रति कोई श्रद्धा हैँ ? नहीं कदापि नहीं, वे स्वयं ईमानदारी से सर्वे करा ले। ये गिद्ध राजनेता और अधिकारी दलितों, पिछडो और भारत की जनताओं को धोखा देकर उन्हें लूट रहे हैँ, और सजगता नहीं बनी तो लूटते ही रहेंगे।

मंहगाई व भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पाने के कारण भी स्पष्ट हैँ,कि सत्ता पाने के बाद भी सत्ता सीन दल का नेता अपने को इस देश का भाग्य विधाता समझ बैठता हैँ। एयर कंडीशन रूम में बैठकर मजदूर, किसानों के श्रम का मूल्यांकन करता हैँ। आम लोगों के बीच जाने से वे कतराने लगता हैँ। वह भूल जाता हैँ कि पांच वर्ष बाद फिर डूबारा उसके बीच जाना हैँ ।

शहर, बाजार और गाँव के चौपालों से लेकर सत्ता के गलियों तक कोई भी स्थान आज भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं बचा हैँ। प्रत्येक काम में रिश्वत अनिवार्य बनने लगा हैँ ।रिश्वत अर्थात भ्रष्टाचार आज शिष्टाचार बन चुका हैँ ।

अगर नहीं तो भ्रष्टाचार व मंहगाई फैलाने वालो को गद्दार की संज्ञा देकर उसे रासुका के तहत क्यों नहीं बन्द किया जा रहा हैँ ? आज जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी हैँ, वह उतना अधिक शक्तिशाली बन आजाद घूम रहा हैँ । देश भक्त और क़ानून प्रिय लोग आज विवश व लाचार हैँ ।आखिर ऐसा कब तक चलेगा ?

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