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नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री बद्री मंडल को विनम्र श्रद्धांजलि

“ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना ” प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार 23 दिसंबर 2025 को जब पूर्वी नेपाल बिराटनगर निवासी एक प्रख्यात समाजसेवी, लोकप्रिय जननेता पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. बद्री प्रसाद मंडल को प्रकृति ने नेपाल वासियों से छीन लिया l उनका जन्म 14 अगस्त 1942 को बिराटनगर में…

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“ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना ”

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार

23 दिसंबर 2025 को जब पूर्वी नेपाल बिराटनगर निवासी एक प्रख्यात समाजसेवी, लोकप्रिय जननेता पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. बद्री प्रसाद मंडल को प्रकृति ने नेपाल वासियों से छीन लिया l

उनका जन्म 14 अगस्त 1942 को बिराटनगर में हुआ था l वे 83 वर्ष 04 महीना 09 दिन के थे l कौन जानता था कि वे चंद वर्षो में ही अपनी लगन और निष्ठा के बल पर प्रतिबद्ध और सरोकार पूर्ण राजनीति के माध्यम से नेपाल के राजनीति की एक साक्षी बनकर उभरेंगे l

राजशाही समर्थक और उप प्रधानमंत्री बद्री प्रसाद मंडल नेपाल के सदभावना पार्टी के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष थे l एक प्रमुख राज भक्त होने के नाते उन्होंने दो पूर्व राजाओं बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह और उनके भाई ज्ञानेंद्र शाह का विश्वास अर्जित किया और उन्हें बार -बार राजकीय जिम्मेदारियों पर नियुक्त किया गया l

नेपाल की राजनीति में दलितों, पिछड़ा, अति पिछड़ा, मधेशी एवं उपेक्षित के रहनुमा बद्री प्रसाद मंडल दिन दुःखियों और गरीबों के न सिर्फ सच्चे दोस्त थे, बल्कि उनका सम्पूर्ण जीवन और कर्म गरीबों के लिए समर्पित था l

उनकी उपस्थिति आज के बदले हुए संदर्भ में कुछ ज्यादा ही सिद्धत से महसूस की जा रही हैं l उन्होंने मधेश राजनीति के जरिए नेपाल में समय -समय पर परिवर्तन की जो नींव रखी उसकी तासीर आज भी कम नहीं हुई हैं l बल्कि विषम होती स्थितियों में और प्रासंगिक हो उठी हैं l

“सादा जीवन उच्च विचार ” उनकी जीवन की पहली प्राथमिकता थी l

बद्री प्रसाद मंडल जी में रैखिक विकास के साथ ही तत्कालीन समय, समाज और राजनीति में की गई इनकी प्रवृतियाँ उसकी आंतरिक और बाहरी गुत्थियां आकर उपस्थित होती हैं l

नेपाल की मधेशवाद की आवाज़ को मुखर स्वर देने का सवाल हो या फिर बहुसंख्यक आबादी के हित चिंतन का सवाल या फिर नेपाली की जगह हिन्दी – मैथिली के अहमियत को रेखांकित करने की पहल हो या मधेशी आंदोलन में सक्रियता का, इन मसलों पर उनकी राजनीतिक पहल का कायल पूरा नेपाल रहा हैं l

2004 में बी एस में राजा ज्ञानेंद्र शाह के नेतृत्व में गठित मंत्री मंडल में उन्हें तीसरे वारिष्ठता क्रम पर कृषि मंत्री बनाया गया l

गणतंत्र की स्थापना के बाद,वे लम्बे समय तक राजनीति से निष्क्रिय रहें और फिर सदभावना पार्टी के माध्यम से सक्रिय राजनीति में लौटे l उस समय मोरंग जिले के अध्यक्ष रहें l मंडल 1981 बी एस में पहली बार शाही परिवार के करीब आए और उन्हें वित्त सहायक मंत्री नियुक्त किया गया l 1986 बी एस में उन्होंने कानून और न्याय मंत्री के रूप में भी कार्य किया l

वे मोरंग के एक पुराने और सक्रिय नेता थे l पंचायत काल में उन्होंने कई बार मंत्री पद संभाला था l उसने अपना इतिहास स्वयं रचा था l मंडल मधेशी समुदाय के पहले व्यक्ति थे, जो गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री दोनों पदों पर पहुंचे l पूर्वी नेपाल में कभी एक शक्तिशाली नेता रहें मंडल की प्रमुखता गणतंत्र की स्थापना के बाद कम हो गई l

बाद में उन्होंने गजेंद्र नारायण सिंह द्वारा स्थापित सदभावना पार्टी के माध्यम से राजनीति में पून: प्रवेश किया, और अपने जीवन के उतरार्ध में राजशाही राजनीति से जुड़े रहें l

कुछ व्यक्ति पद पाकर गौरवान्वित होते हैं, तो कुछ महान व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पाकर पद धन्य हो जाता हैं, और इन्हीं कुछ महान लोगों में एक स्व: बद्री प्रसाद मंडल जी थे l “कर्मणये वा धिकारस्ते माँ फलेशु कदाचन ”

गीता के इस सुक्ति पर आजीवन अमल करने वाले स्व: मंडल हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें l उनका सम्पूर्ण जीवन और व्यक्तित्व करुणा, मर्यादा और मानवीय मूल्यों से ओत प्रोत था l सबसे बड़ी बात यह थी कि अधिकार से वंचित गरीबों मधेशी के वह अपने थे l गरीबों मधेशी की व्यथा ही उनकी व्यथा थी l सच्चे अर्थो मैं वे मधेशी गरीबों के मसीहा थे फलस्वरूप मधेशी गरीबों और शोषितों ने उनके जीवन काल में ही उन्हें अपना मसीहा कहना सम्बोधित करना प्रारम्भ कर दिया था l

जो भी मांगने आया उसे कभी भी खाली हाथ नहीं लौटाया चाहे याचक जो भी हो l स्व:मंडल “जाति न पूछो साधु की ” पर आजीवन अमल करते रहें l वे पूरे नेपाल मैं शांति, सौहार्द तथा सभ्यक विकास के लिए सतत प्रयत्नशील रहें l

गीत की चंद पक्तियां हमें बार -बार याद आती हैं : – “एक दिन बिक जाएगा माटी के बोल “जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल ” को स्मरण करते हुए इतना निश्चित ही कहाँ जा सकता हैं कि स्व: बद्री प्रसाद मंडल जी के बोल वचन, विधा, त्याग जब -जब नेपाल वासियों को याद आते रहेंगे, तब -तब उन्हें मर्माहित करता रहेगा,और अन्त में………”ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना “l

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