कटाक्ष:-अब कहाँ चली गई शहर की मानवता? जिसका ढोल पूरी दुनिया में बजाते हो?
इंदौर के भागीरथ पूरा क्षेत्र में नगर निगम की घटिया जल वितरण प्रणाली के चलते दूषित पानी की मिलावट हो गई और अब तक 12 मृत्यु दर्ज हो चुकी है और 150 के लगभग निरीह जनता अस्पतालों में ईलाज रत है।
घटनाक्रम होते ही प्रशासन और सरकार के हाथ पैर फूल गए और ताबड़तोड़ एक्शन लिए जाने लगे लेकिन जो होनी थी वो हो गई! घटना होते ही मुद्दावीर जागे मौका परस्त जागे, तख्तियां लेकर पांच पचास की भीड़ भेली करके चौराहों, अफ़सरान के कार्यालयों पर जिंदाबाद मुर्दाबाद करने वाले जागे, साथ ही पिटीशन बाज भी जाग गए।
मीडिया का तमगा लगाए चुनिन्दा एजेंडा चलाने में माहिर लिए कतिपय प्रिंट, सोशल आदि मीडिया के जरिए रील, वीडियो अपलोड करने में माहिर और समस्याओं के दम पर चौके चूल्हे चलाने वाले भी धरती फाड़ के बाहर निकल आए! आरोप, प्रत्यारोप का दौर नेता, अफसरों की नाकामियों जो कि हुई है और कड़ी कार्यवाई होना चाहिए।
अब बडा आंदोलन भी हो सकता है लेकिन ये सब नववर्ष की संध्या के मौज मजे के बाद! 31 दिसंबर की रात्रि और नववर्ष का जश्न मानवता का असली रूप दिखा गया, पब, डांस बार, होटल, गार्डन, ठेके जैसी जिसकी हैसियत थी इंदौर के बाशिंदों ने खूब ऐश किए, दारू शारू, वेज, नॉनवेज और पूरी रात मदहोश होकर नाच गाना चला, शहर के भीतर तो छोड़ो शहर के बाहरी अड्डे तक भरपूर रौनक थी ! इन सब में वो भी थे जो गरीबों की मृत्यु पर मीडिया और कैमरा देखने ही पीड़ितों से ज्यादा आक्रोश में दहाड़ मार कर रूदाली की तरह रो रहे थे ।
जैसे ही रात्रि के बारह बजे जो धूम धडाका आतिशबाजी हुई ऐसा लगा लगा ये इंदौर नहीं न्यूयार्क हो! 31 दिसंबर की शाम तक जिस घटना का रोना धोना चीख पुकार चल रही थी, रात में सब भूल गए!
आज भी गाँवों में किसी एक के घर गमी हो जाए तो अंतिम संस्कार होने तक, तीसरा होने तक जैसी रीति हो गांव के किसी घर में चूल्हा तक नहीं जलता और ये मालवा की भी परम्परा है लेकिन गांव तो छोड़ो पड़ोसी मुहल्ले तक में कोई असर नहीं हुआ! वही बेचारे चार पड़ोसी, नाते रिश्तेदार एक खामोशी जो दुःख से भरपूर थी सिर्फ वही साथ थी!
अब एक जनवरी को फिर से उतारा लेने के बाद, महफिल की खुमारी उतरने के बाद फिर से मुद्दा याद आने लगेगा अभी तो लाशों की राजनीति करने वाले बाहरी विशालकाय गिद्ध , भेड़िये तो बुलाए ही नहीं गए उन्हें लाकर सब पूरा ड्रामा खेला जाएगा पीड़ितों की भावनाओ को कैसे अपने फायदे में तबदील किया जाए !
कतिपय सुपारी बाज एजेंडा धारियों द्वारा आयडी का माइक लेकर बयान, वक्तव्य देने वाले नेताओं, अफसरों के लगभग मुँह के अंदर घुसकर किसने क्या बोला उसकी मंशा क्या थी वो एक तरफ रखकर बयान को गन्ने की चरखीं से निकालकर तोड़ मरोड़कर विवादास्पद बनाकर उसे दिन रात जनता के दिमाग में ठूंसा जाएगा!
ऐसा मीडिया ट्रायल होगा जिसमें मुद्दई, वकील, जज सब हम ही होंगे, हम ही फैसला भी सुना देंगे! किसी को परवाह नहीं किसी की, कुछ मुआवजा, कुछ वादे, कुछ सलाह-मशविरा बस पीड़ितों की जिंदगी में बस इतना ही आएगा!
लेकिन देश के सबसे स्वच्छ शहर की जनता, नेताओं, अफसरों में मानवता कितनी है ये इस दुःखद घटना और नववर्ष के मौज मजे ने एक साथ आकर बता दिया कि शहर में इंसान नहीं “आदमी” बसते है जिनके दिलों से मानवता, सम्वेदना,दया भी स्वच्छता की झाड़ू से साफ़ कर दी गई है! जब जनता ही संवेदनहीन है तो उनपर बैठे अफसर या नेता भी उसी सोच के होंगे क्योंकि ये जनता के बीच से ही आते हैं
मंगल ग्रह से नहीं!वो तो भला हो कि इस घटना में पीड़ित का सम्बंध किसी विशेष जाति, धर्म का नहीं निकला वर्ना जो हंगामा और माहौल बनता कि सारे नववर्ष का लुत्फ लेना भूल जाते!प्रदेश के मुखिया और शीर्षस्थ अफसरों को इस प्रकरण को गंभीरता से लेना चाहिए
और जल प्रदाय जैसी जीवनावश्यक सेवा में कोई कोताही नहीं हो इसके लिए कड़े फैसले ले वर्ना जनता से इकट्ठा हुए टैक्स के पैसों को भूमिगत पाइपलाइन व्यवस्था को भ्रष्ट ठेकेदारों ,नेताओं और अफसरों के गठजोड़ के भरोसे ना छोड़े, इसी खराब व्यवस्था के चलते शहर से टैंकर माफिया साल भर करोड़ों कूट ता है ,आयें दिन ” जलूद के पम्प, वाल्व, बार बार फूटती नर्मदा पाइपलाइन की मरम्मत टंकी सफाई के नाम पर ” शहर का जल प्रदाय बाधित होता है बदले में ठेकेदारों और टैंकर माफिया और भ्रष्ट अफसरों और नेताओं के वारे न्यारे होते है !
अभी तो ठंड का मौसम है आने वाले महीने गर्मी के रहेंगे अगर ऐसा ही चला तो इस बार पीड़ित जनता से किसी प्रकार के धैर्य की अपेक्षा मत रखियेगा ! उम्मीद है कि एक झोलाछाप पत्रकार की आवाज आप तक और जिम्मेदारों तक पहुंचेगी ! प्रार्थना करें कि वर्ष 2026 में ऐसा कुछ भी न हो सभी स्वस्थ, सुरक्षित और प्रसन्न रहें! इसीलिए कहा गया है कि एकमात्र ईश्वर ही ऐसा है जो आपका दर्द समझ सकता है
🙏🙏✍️ उल्हास कुमार सोवनी उद्योग सुरक्षा समाचार से

























