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राजस्थान। महाराणा प्रताप विजय दिवस: शाहपुरा से चित्तौड़गढ़-उदयपुर जाएंगे सैकड़ों सनातनी, संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुख्य आतिथ्य में मनेगा ऐतिहासिक ‘हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:-शती समारोह’

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-“भाग ऊँ हूँण भड़ मिलै, न ह तपस्या रे ताप।इण गिण माँ जीवंत जलै, जद जनम परताप।।”मेवाड़ की पावन धरा पर शौर्य और स्वाभिमान का एक नया इतिहास रचने जा रहा है। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की हल्दीघाटी विजय के गौरवशाली 450 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आगामी 17 जून…

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-“भाग ऊँ हूँण भड़ मिलै, न ह तपस्या रे ताप।इण गिण माँ जीवंत जलै, जद जनम परताप।।”मेवाड़ की पावन धरा पर शौर्य और स्वाभिमान का एक नया इतिहास रचने जा रहा है। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की हल्दीघाटी विजय के गौरवशाली 450 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आगामी 17 जून 2026 (बुधवार) को भव्य ‘हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:-शती समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है।

भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन इसलिए भी अत्यंत पवित्र है क्योंकि इसी दिन महाराणा प्रताप की जन्म जयंती (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, विक्रम संवत 2083) भी है। इस राष्ट्र-चेतना महासंगम और विजय दिवस में सम्मिलित होने के लिए शाहपुरा क्षेत्र के सैकड़ों सनातनी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और राष्ट्रभक्त पूरे उत्साह के साथ उदयपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

मुख्य वक्ता होंगे संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत

प्रताप गौरव केन्द्र “राष्ट्रीय तीर्थ” और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस विराट समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव भागवत मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

यह भव्य कार्यक्रम बुधवार, 17 जून 2026 को प्रातः 09:30 बजे से उदयपुर के महाराणा भूपाल स्टेडियम (गांधी ग्राउंड) में आयोजित किया जाएगा।इतिहास की भूलों को सुधारता ‘विजय दिवस’: हल्दीघाटी कोई अनिर्णित युद्ध नहीं, महा-विजय थी।

इतिहास के पन्नों में दर्ज 18 जून 1576 की हल्दीघाटी की लड़ाई को लेकर वामपंथी इतिहासकारों द्वारा फैलाई गई विकृतियों को दूर करते हुए यह आयोजन संपूर्ण राष्ट्र को यह संदेश दे रहा है कि हल्दीघाटी का युद्ध कोई अनिर्णित मुकाबला नहीं था। खमनोर (हल्दीघाटी) के मैदान में प्रताप की सेना ने वीरता से लड़कर मुगलों के छक्के छुड़ाए थे और यह विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध महाराणा प्रताप की एक बहुत बड़ी महा-विजय थी।

इतिहास के इसी गौरवशाली सत्य को स्थापित करने के लिए प्रताप गौरव केंद्र पर ‘हल्दीघाटी दीर्घा’, ‘मेवाड़ रत्न दीर्घा’ और ‘रोबोटिक शो’ जैसी विभिन्न प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

शाहपुरा से जाने वाले राष्ट्रभक्तों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस):समारोह समिति द्वारा सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ विशेष नियम जारी किए गए हैं, जिनका शाहपुरा से जाने वाले यात्रियों को कड़ाई से पालन करना होगा

:प्रवेश द्वार क्रमांक 1 से एंट्री: स्टेडियम में सभी आगंतुकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश केवल प्रवेश द्वार क्रमांक 1 (Gate No. 1) से ही दिया जाएगा।

समयबद्धता: कार्यक्रम ठीक प्रातः 09:30 बजे शुरू हो जाएगा, इसलिए सभी को समय से पूर्व अपनी सीट ग्रहण करने की अपील की गई है।शाहपुरा में भारी उत्साह, सपरिवार पहुंचने का आह्वानशाहपुरा में इस ऐतिहासिक दिन को विजय दिवस के रूप में मनाने के लिए युवाओं और मातृशक्ति में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के पदाधिकारियों (प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, दीपक कुमार शुक्ल, महावीर चपलोत, अनुराग सक्सेना आदि) के आह्वान पर शाहपुरा के स्थानीय संगठनों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने सभी सनातनियों से अपील की है कि वे इस ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के आमंत्रण पर अपने इष्ट-मित्रों सहित सपरिवार पहुंचकर इस ऐतिहासिक और गौरवमयी पल के साक्षी बनें।

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