56 से अधिक हेक्टेयर सहित कई सर्वे नंबरों की चरनोई भूमि पर अतिक्रमण का मामला।
सुरेश मेहर रिपोर्टर जिला मंदसौर तहसील गरोठ
नगर भाजपा अध्यक्ष सुरेश सिंह सहित ग्रामीणों ने गौ-चरनोई भूमि मुक्त कराने की मांग उठाई।गरोठ– तहसील गरोठ के ग्राम चिकन्या में गौ-चरनोई की शासकीय भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण का मामला सामने आया है।
गांव के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर गौ-चरनोई भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की चरनोई भूमि पर कुछ लोगों द्वारा लंबे समय से कथित रूप से अवैध कब्जा कर खेती एवं निजी उपयोग किया जा रहा है, जिससे गांव के पशुओं के लिए चराई का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम चिकन्या स्थित सर्वे नंबर 1177 रकबा 56.00 हेक्टेयर एवं सर्वे नंबर 1420 रकबा 111 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में गौ-चरनोई के रूप में दर्ज है। यह भूमि गांव के मवेशियों के चरने के लिए सुरक्षित है, लेकिन इस पर कथित रूप से अवैध कब्जे होने से इसका उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
पशुओं के सामने चराई का संकट—-
ग्रामीणों का आरोप है, कि चरनोई भूमि पर कब्जों के कारण पशुओं के लिए पर्याप्त चराई क्षेत्र उपलब्ध नहीं है। मवेशी गांव और खेतों में भटकने को मजबूर हैं, जिससे पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में पशुपालन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पूर्व में भी दिए जा चुके हैं, आवेदन—-
ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में पूर्व में कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं तहसीलदार को भी लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और उनका कहना है, कि शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग—-
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मांग की है, कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर गौ-चरनोई भूमि को तत्काल अतिक्रमणमुक्त कराया जाए, ताकि गांव के पशुओं को चराई के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो सके तथा शासकीय भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जा सके।
इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज—
इस मांग को लेकर नगर भाजपा अध्यक्ष सुरेश सिंह, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है, कि गौ-चरनोई भूमि से अवैध कब्जे हटाकर उसे पुनः चराई के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए, जिससे गांव के पशुधन एवं पशुपालकों के हितों की रक्षा हो सके।















