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राजस्थान। 75 से अधिक विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह खोज अभियान में लिया भाग, दो क्षुद्रग्रहों की खोज से बढ़ाया विद्यालय का गौरव

अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस पर विद्यार्थियों की उपलब्धि बनी प्रेरणा शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-प्रतिवर्ष 30 जून को अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस (International Asteroid Day) मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन वर्ष 1908 में रूस के साइबेरिया स्थित तुंगुस्का क्षेत्र में घटित तुंगुस्का घटना (Tunguska Event) की स्मृति में किया जाता है। 30 जून 1908 को एक…

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अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस पर विद्यार्थियों की उपलब्धि बनी प्रेरणा

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-प्रतिवर्ष 30 जून को अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस (International Asteroid Day) मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन वर्ष 1908 में रूस के साइबेरिया स्थित तुंगुस्का क्षेत्र में घटित तुंगुस्का घटना (Tunguska Event) की स्मृति में किया जाता है। 30 जून 1908 को एक विशाल क्षुद्रग्रह/उल्का के वायुमंडलीय विस्फोट से लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था।

इसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी ज्ञात क्षुद्रग्रह-जनित वायुमंडलीय घटना माना जाता है।इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पनोतिया के विज्ञान शिक्षक महेश कुमार कोली (साइबर पीस सम्मानित शिक्षक, टीचर एक्सीलेंस अवॉर्ड प्राप्तकर्ता एवं शून्य निवेश नवाचार पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) ने बताया कि विद्यालय में इंटरनेशनल एस्टेरॉइड सर्च कैंपेन (International Asteroid Search Campaign-IASC) नासा, के अंतर्गत समय-समय पर संचालित विभिन्न अभियानों में उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

अभियान के दौरान 75 से अधिक विद्यार्थियों ने क्षुद्रग्रह खोज, खगोलीय चित्रों के विश्लेषण तथा वैज्ञानिक डेटा अध्ययन का प्रशिक्षण प्राप्त कर सफलतापूर्वक प्रमाणन अर्जित किया।

विद्यार्थियों द्वारा किए गए विश्लेषण के आधार पर 2022 QV57 एवं 2024 SD57 नामक दो क्षुद्रग्रहों की सफलतापूर्वक खोज की जा चुकी है। आगामी चरण में इन क्षुद्रग्रहों को नाम देने का अवसर अभियान से जुड़े विद्यार्थियों को मिलेगा, जो उनके लिए अत्यंत गर्व, सम्मान एवं प्रेरणा का विषय है।

कोली ने कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान कौशल, तार्किक सोच तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करती हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को वैश्विक वैज्ञानिक अभियानों से जोड़कर उन्हें भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान, नवाचार एवं खगोल विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में शीघ्र ही “अंतरिक्ष क्लब (Space Club)” की स्थापना की जाएगी। इस क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान, क्षुद्रग्रह खोज, उपग्रह अध्ययन, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रॉकेट मॉडलिंग, तारामंडल अवलोकन तथा अन्य अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी गतिविधियों में अधिकाधिक भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

क्लब का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक अभियानों से जोड़कर भविष्य के वैज्ञानिक एवं अंतरिक्ष शोधकर्ता के रूप में तैयार करना है।

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