प्रेस वार्ता में भारत स्वाभिमान यात्रा के जिला अध्यक्ष प्रेम नारायण दांगी ने उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में भारत स्वाभिमान यात्रा के जिला अध्यक्ष प्रेम नारायण दांगी ने उठाए सवाल
मोदी के 76वें जन्मदिन पर सेवा, संकल्प और सद्भावना दिवस मनाया; बोले—सत्ता परिवर्तन में भूमिका निभाने वालों को नहीं मिला मान-सम्मान lपचोर। भारत स्वाभिमान यात्रा के जिला अध्यक्ष प्रेम नारायण दांगी (सरपंच
) ने प्रेस वार्ता आयोजित कर संगठन की यात्रा और अपने साथियों के योगदान को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर सेवा, संकल्प एवं सद्भावना दिवस मनाए जाने की बात कही।दांगी ने कहा कि हरिद्वार की हर की पैड़ी पर बाबा रामदेव के साथ उन्होंने संकल्प लिया था कि देश में सत्ता
परिवर्तन के लिए जनजागरण किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ राजगढ़ जिले के लगभग 450 गांवों का भ्रमण कर सेवा, सद्भावना, संकल्प, सत्ता परिवर्तन, सामाजिक एकता, भाईचारा और नव राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जनसंपर्क किया तथा नरेंद्र मोदी के लिए समर्थन की अपील की।उन्होंने कहा कि आज मोदी के नेतृत्व में 25 वर्ष पूरे होने और सेवा-संकल्प एवं सद्भावन
दिवस मनाए जाने के अवसर पर उन कार्यकर्ताओं और साथियों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्होंने उस समय गांव-गांव जाकर अभियान में भूमिका निभाई थी।अवधेश दीक्षित के मामले को लेकर उठाया मुद्दाप्रेस वार्ता में प्रेम नारायण दांगी ने ग्राम गांगाहोनी, हाल मुकाम पचोर निवासी अवधेश दीक्षित की जमीन का मामला भी उठाया।
उन्होंने बताया कि दीक्षित की जमीन तालाब के डूब क्षेत्र में चली गई है। उनके अनुसार, इस संबंध में एसडीएम, जिला कलेक्टर से लेकर भोपाल स्तर तक शिकायत किए जाने के बावजूद अभी तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति को न तो जमीन का उचित हर्जाना मिला और न ही समस्या का समाधान हुआ।दांगी ने कहा कि “सत्ता
परिवर्तन में अहम भूमिका निभाने वाले हमारे साथियों को आज मान-सम्मान नहीं मिल रहा है। हमारी बात कौन सुनेगा और हम किससे उम्मीद करें?”उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जनजागरण और सत्ता परिवर्तन के अभियान में अपना समय दिया, उनकी समस्याओं पर भी सरकार और प्रशासन को
ध्यान देना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अपने साथियों की उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि “यह कैसा सत्ता परिवर्तन है, जिसमें संघर्ष करने वाले साथियों को ही सम्मान और न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।” इस दौरान उनके साथ राम प्रसाद रुहैला, शिवनारायण कुशवाहा,शम्भू नाथ आदि साथी उपस्थित रहे l