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रिश्ते जो संभाले हुए है उन्हें कभी-कभी बिना बुलाए भी संभाल लेना चाहिए

बहन जिस दिन भाई को संभालने आ जाए वह दिन हो जाता भाईदूज-कुमुदलताजी म.सा. महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में ज्ञानपंचमी पर सरस्वती अनुष्ठान एवं आगम यात्रा कल शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। भीलवाड़ा,24 अक्टूबर। रिश्ते जो संभाले हुए है उन्हें कभी-कभी बिना बुलाए भी संभाल लेना चाहिए। बिना बुलाए संभालते रहने पर रिश्ते संभले हुए रहते है।…

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बहन जिस दिन भाई को संभालने आ जाए वह दिन हो जाता भाईदूज-कुमुदलताजी म.सा.


महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में ज्ञानपंचमी पर सरस्वती अनुष्ठान एवं आगम यात्रा कल

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

भीलवाड़ा,24 अक्टूबर। रिश्ते जो संभाले हुए है उन्हें कभी-कभी बिना बुलाए भी संभाल लेना चाहिए। बिना बुलाए संभालते रहने पर रिश्ते संभले हुए रहते है। किसी को समय पर संभाला तो वह सारी जिंदगी तुम्हे संभालेगा लेकिन किसी को समय पर नहीं संभाला तो हो सकता वह रिश्ता ही खत्म हो जाए।

बहन ही है जो उस भाई को संभाल सकती जिसे कोई नहीं संभाल पा रहा हो। बहन यदि निस्वार्थ भाव से भाई का सही मार्गदर्शन करें तो भाई के सोए हुए नसीब जगते है।

ये विचार श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय मालव सिंहनी पूज्या श्री कमलावतीजी म.सा. की सुशिष्या अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में शुक्रवार को भाईदूज प्रसंग पर प्रवचन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि बहन को कभी अपने स्वार्थ के लिए भाई को नहीं भटकाना चाहिए।

बहन में ये शक्ति है कि वह बदनसीब भाई को खुशनसीब भी बना सकती है। भगवान महावीर के निर्वाण प्राप्त होने पर गमगीन भाई नंदीवर्धन को संभालने का कार्य उनकी बहन सुदर्शना ने ही किया।सुदर्शना ने ही भोजन नहीं कर रहे अपने भाई के मुंह में हाथ से भोजन का कोर डाला।

नंदीवर्धन के एक कोर मुंह में लेते ही पूरा कुण्डलपुर मुस्करा उठा और घर का वातावरण सहज होने लगा।तभी से भाईदूज का पर्व मनाया जाने लगा। साध्वीश्री ने कहा कि जब कभी भाई को जरूरत है ओर बहन संभालने और सहयोग के लिए पहुंच जाए तो वह दिन भाईदूज है। अपने भाई से आगे सहधर्मी भाई व उससे भी आगे मानवजाति के सभी प्राणी को संभालना चाहिए।

हमारे देने से दूसरों को नहीं हमें ही मिलता है। ये नहीं सोचे कि मैं दे रहा हूं इसलिए दूसरों को मिल रहा है।जो हमे प्राप्त हुआ है उसकी समय पर कद्र करते रहो।धर्मसभा में महाप्रज्ञाजी म.सा. ने प्रेरणादायी भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल भक्तिमय बना दिया।

वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।चातुर्मासिक आयोजनों के तहत रविवार 26 अक्टूबर को ज्ञान पंचमी पर सुबह 8.30 बजे से बच्चों के लिए सरस्वती अनुष्ठान होगा जिसमें उनके परिवारजन भी शामिल हो सकेंगे।

बच्चों को कार्यक्रम स्थल पर कूपन दिए जाएंगे जिनके सहारे वहीं पर बाद में वह सरस्वती यत्र प्राप्त कर सकेंगे। इससे पूर्व सुबह 7.45 बजे सुभाषनगर स्थानक से कार्यक्रम स्थल आरसी व्यास कॉलोनी में गेट न.33 के पास स्कूल के नजदीक ग्राउण्ड तक भव्य आगम वरघोड़ा निकाला जाएगा जिसमें श्रावक श्राविका आगम श्रद्धा के साथ सिर पर रखकर चलेंगे।

वरघोड़ा से पूर्व श्रावक श्राविकाओं के लिए नवकारसी का आयोजन भी रखा गया है। चातुर्मासिक साप्ताहिक पद्मावत एकासन आराधना के लाभार्थी परिवारों एवं धर्मसभा में विभिन्न स्थानों से पधारे अतिथियों का स्वागत का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या,सचिव राजेन्द्र सुराना, सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी, मंत्री बंशीलाल बोहरा, महिला मण्डल की अध्यक्ष निर्मला भड़कत्या, मंत्री लाड़जी मेहता सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने किया।

संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।प्रवचन के बाद महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में पद्मावति एकासन विधि सम्पन्न कराई गई।

माता पद्मावती की आराधना करते हुए एकासन विधि स्वरसाम्राज्ञी महाप्रज्ञाजी म.सा. एवं वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सम्पन्न कराई। साप्ताहिक पद्मावति एकासन आराधना का उद्यापन 31 अक्टूबर को होगा।

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