शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शक्करगढ़-आज के दौर में जहां शादी-विवाह में दिखावे, फिजूलखर्ची और दहेज प्रथा का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं शक्करगढ़ निवासी शिक्षक सुनील कुमार रेगर ने सादगीपूर्ण विवाह कर समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया है।
शक्करगढ़ निवासी सुनील कुमार रेगर (व्याख्याता), पुत्र कैलाशचंद रेगर (वरिष्ठ अध्यापक) ने डिग्गी (टोंक) निवासी किरण वर्मा (संगणक), पुत्री प्रकाश वर्मा (सेवानिवृत्त लेखाधिकारी) के साथ 10 मई 2026 को बेहद सादगी और सामाजिक संदेश के साथ विवाह संपन्न किया।
इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि विवाह समारोह में मात्र 5 बाराती शामिल हुए तथा वर पक्ष द्वारा केवल श्रीफल और 1 रुपया स्वीकार किया गया। विवाह में न दहेज लिया गया, न पहरावणी की रस्म निभाई गई और न ही बैंड-बाजे, स्टेज व अन्य दिखावटी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
दोनों परिवारों ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सिद्धांतों को अपनाते हुए सादगी, समानता और सामाजिक सुधार का संदेश दिया।
इस अनूठे विवाह की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे शिक्षित और जागरूक परिवार समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। खासकर युवाओं को यह संदेश दिया गया कि विवाह जीवन का पवित्र बंधन है, इसे दिखावे और आर्थिक बोझ का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी ऐसे विचार अपनाए तो दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची और सामाजिक प्रतिस्पर्धा जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकती है। एक शिक्षक परिवार द्वारा प्रस्तुत यह उदाहरण शिक्षा विभाग के साथ-साथ पूरे समाज के लिए गर्व की बात है।
यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, समानता और सादगी का प्रेरणादायी संदेश बनकर सामने आया है।















