संस्थापक ऋषि सरदाना बोले – “मां की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर बना मिशन”
सैनिटरी पैड से बेटियों के कन्यादान तक पड़ाना- मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील के ग्राम पड़ाना में कन्यादान फाउंडेशन का पहला और देशभर में 108 वा कार्यक्रम बड़े उत्साह और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से पधारे कन्यादान फाउंडेशन के संस्थापक ऋषि सरदाना ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा, _”15 अगस्त 2019 को मां की प्रेरणा से इस मुहिम की शुरुआत की थी।
उद्देश्य सिर्फ एक था – गरीब परिवार की बेटियों का कन्यादान कराना और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना। शुरुआत में यह मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। मेरी बहनों ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया और आज हम 108वां कार्यक्रम पूरा कर रहे हैं।
ऋषि सरदाना ने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा कि कन्यादान सिर्फ एक रश्म नहीं समाज को जोड़ने का सेतु है जब हम एक बेटी का हाथ थमते हैं तो पूरा समाज मजबूत होता है।
कन्यादान फाउंडेशन संस्था का कार्य करने का तरीका बेहद अनूठा है संस्था द्वारा सैनिटरी पेट के निर्माण और बिक्री से होने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा कन्यादान कोर्स में जमा करता है इस कोर्स का उपयोग समाज के उन बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देने के लिए किया जाता है चीन के परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है।
इस मौके पर संस्थापक ने विशेष रूप से उन बहनों का आभार जताया जिन्होंने इस यात्रा में हर कदम पर सहयोग दिया!इस दौरान श्रीमती दीपा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की मुख्य बातें को लेकर कहां की कन्यादान फाउंडेशन मध्य प्रदेश में यह फाउंडेशन का पहला आयोजन है। जो कीबेटियों का सम्मान में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सामूहिक कन्यादान कराया गया।
संस्थान ने जीवन विजय पुरिया कि पुत्री के विवाह के अवसर पर उनके परिवार को 51000 की आर्थिक सहायता राशि भेंट की कार्यक्रम के दौरान कहा कि नारी शक्ति की असली पहचान सिर्फ बाहर निकलना नहीं घर से ही बदलाव लाना है हमारी बहन ने घर बैठकर भी फाउंडेशन में मदद कर रही है उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा सैनिटरी पेड़ की कमाई का तीसरा हिस्सा कन्यादान फाउंडेशन में डोनेट किया जाता है।
हाल ही में फाउंडेशन में गंगाजल टिशू पेपर अभी लॉन्च हुआ है!इसे खास तौर पर भगवान की प्रतिमा पूजा सामग्री और मंदिर को साफ के लिए बनाया गया ताकि सफाई के साथ पवित्रता भी बनी रहे गंगाजल की मौजूदगी के कारण लोग इसे धार्मिक कार्यों में निसंकोच इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस दौरान मेघा विश्वकर्मा ने कहा है कि जब हम नारी शक्ति की बात करते हैं तो अक्सर बड़ी-बड़ी उपलब्धियां की तस्वीर सामने आती है। लेकिन वही कन्यादान फाउंडेशन के अनुभव ने सिखाया की शक्ति का मतलब सिर्फ मंच नहीं होता हमारी बहनें घर बैठकर भी इस मिशन को मजबूती दे रही है।
कोई फोन किसी बेटी को समझा रही है तो कोई अपने हुनर से सहयोग कर रही है। यही तो असली सशक्तिकरण ने जब हर बहन घर से ही बदलाव की साथी बन रही है। वही काजल सक्सेना ने कहा कि कन्यादान फाउंडेशन का संकल्प है कि कोई भी बेटी सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। 108वाँ कार्यक्रम की यह यात्रा “सेवा से सशक्तिकरण” की मिसाल बन चुकी है।
इस मौके पर देवयानी सक्सेना सुषमा परमार सहित अन्य नारी शक्ति उपस्थित रहे वहीं ग्रामीण हरिप्रसाद विश्वकर्मा किरण चंद्र सक्सैना डॉक्टर वर्मा अजय महेश्वरी इत्यादि समाजसेवी व ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा है कि गांव के लिए गर्व का विषय है कि 108 वाँ कन्यादान फाउंडेशन कार्यक्रम यहां आयोजित हुआ।




