आजकल देश में महगाई की मार है या नहीं इसकी पुष्टि तो उपभोक्ता कर सकता है। इसमें भी कोई शक नहीं है कि जिस तरह से तेल, शक्कर और अन्य चीजों पर दाम बडे जिससे आम आदमी की कमाई का हिसाब किताब बिगाड़ दिया है। देश हित प्रधानमंत्री का अवाहान पर कितना असर जनता पर होगा पता नहीं लेकिन आज के समय में घर में रसोई गैस का सबसे बडा असर पड रहा है।
आपको बता दे कि बडे शहरों में रसोई गैस की बडी किल्लत देखने को मिल रही है। समय पर उपभोक्ताओ को गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे है और वही बडी तादाद में गैस सिलेंडर की काला बाजारी चल रही है। शहरों में एक गैस सिलेंडर 2500 से 3000 रू तक ब्लैक में मिल रहे है, वही बुकिंग के तीन चार दिन बाद सिलेंडर कंफर्म होता है वहा भी गैस गोदाम में उपलब्ध रहा तो अन्यथा इंतज़ार के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्र में भी उज्जवला योजना के बाद रसोई गैस की संख्या बड गई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आज भी दुसरा आप्शन चुल्हा रहता है। सबसे बडी समस्या गावों से शहरों में काम करने वाले मजदूर और विद्यार्थीयो के लिए सबसे बडी समस्या बन गई है। वही वे छोटे छोटे परिवार जो वक्त का खाना खाने के लिए शहरों मे रह रहे है यदि खाना बनाते समय अचनाक गैस खत्म हो जाए तो उनके पास भूखे रहने के लिए अलावा कोई रास्ता नहीं दिखाई देता है।
इनके पास न तो दुसरा सिलेंडर होता है और न इतना पैसा कि 3-4 दिनों तक बहार होटल पर पुरे परिवार को दो समय का खाना खिला पाए।
खैर शासन प्रशासन की इस ओर ध्यान देने की जरुरत है। महगाई की असर आम जनता को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। यहा तो केवल रसोई गैस सिलेंडर की बात है लेकिन ऐसी कई वस्तुएँ जो बहुत महगें बजार में बिक रही है। साथ ही सोयाबीन तेल भी इतना महंगा हो गया की आम आदमी की कमाई उसी तेल में तली जा रही है।















