प्रदेश के 90% स्कूल बचाने मैदान में उतरे 35 जिलों के छात्र, शिक्षक और अभिभावक
सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ भोपाल में आयोजित हुआ राज्यस्तरीय कन्वेंशन
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। स्कूल बचाओ संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकारी स्कूलों को बचाने की मुहिम चलाई जा रही है। इसी क्रम में 23 अगस्त को राजधानी भोपाल में राज्यस्तरीय शिक्षक-छात्र-अभिभावक कन्वेंशन का
आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के 35 से अधिक जिलों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।कन्वेंशन में समिति ने राज्य सरकार की सांदीपनी योजना सहित उन नीतियों का विरोध किया, जिनके चलते सरकारी स्कूलों के बंद या विलय किए जाने की आशंका जताई जा रही है। प्रतिभागियों ने मांग की कि स्कूलों के विलय और बंद करने की प्रक्रिया को
तत्काल रोका जाए तथा पूर्व में बंद किए गए प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को पुनः शुरू किया जाए।सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठासमिति के वालंटियर्स द्वारा प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों के किए गए दौरों का हवाला देते हुए कहा गया कि अनेक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर जर्जर भवन, बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था का अभाव, स्वच्छ पेयजल की
समस्या और छात्राओं के लिए उचित शौचालय जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालयों का संचालन भी प्रभावित हो रहा है।समिति का कहना है कि सरकारी स्कूलों की कमियों को दूर करने के बजाय उन्हें बंद या मर्ज
करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, बेहतर भवन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक