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जिला अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, मरीजों को मिल रहा बेहतर उपचार एवं सुविधाओं का लाभ

राजगढ़ 21 मई, 2026 सिविल सर्जन सह मुख्‍य अस्‍पताल अधीक्षक डॉ. रजनीश शर्मा बताया गया कि वर्तमान में जिला चिकित्सालय नवीन भवन में संचालित किया..

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राजगढ़ 21 मई, 2026

सिविल सर्जन सह मुख्‍य अस्‍पताल अधीक्षक डॉ. रजनीश शर्मा बताया गया कि वर्तमान में जिला चिकित्सालय नवीन भवन में संचालित किया जा रहा है। जिसमें मरीजों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य कराये गये है। जिनमें समस्त वार्डों को मरीजों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुये वातानुकूलित (50 एयरकंडिशन सीएसआर फण्ड से प्राप्त) द्वारा सुसज्जित किया गया है।

संपूर्ण अस्पताल परिसर में जनसामान्य को स्वच्छ एवं शुद्ध पीने के पानी हेतु सेंट्रालाइज आर.ओ. वॉटर सिस्टम (सीएसआर फण्ड से प्राप्त) लगाया गया है।साथ ही आर.ओ. के पानी को ठंडा कर वितरण हेतु जिला अस्पताल के प्रत्येक तल पर तीन से चार वॉटर कूलर का इस्ट्रालेशन किया गया। तााकि मरीजों व उनके परिजनों को 24 घंटे ठंडा पानी मुहैया हो सके।

जिला अस्पताल में 100 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम (सीएसआर फण्ड से प्राप्त) इंस्ट्रालेशन होने के कारण बिजली के बिल में संभावित कमी होने से शासन को वित्तीय लाभ हो रहा है। अस्पताल में आधुनिक हाई-कैपेसिटी वॉशिंग मशीनों के माध्यम से बेडशीट धुलाई की नई व्यवस्था शुरू की गई है।

इस नई व्यवस्था के शुरू होने से संक्रमण के खतरे में कमी के साथ समय व राशि की भी बचत हो रही है। डायलिसिस मरीजों को डायलिसिस की सुविधा के लिए छह नई डायलिसिस मशीनें (सीएसआर फण्ड से प्राप्त) होने के बाद कुल दस मशीनें जिला अस्पताल में उपलब्ध है।

जिसमें आठ मशीनें सामान्य मरीजों एव दो मशीन एचआईवी एवं एचबीएसएजी मरीजों हेतु आरक्षित की गई है। प्रतिदिन लगभग 16 मरीजों का डायलिसिस होता है, जो पूर्व में लगभग 6 से 8 मरीज प्रतिदिन था।उन्‍होंने बताया कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब ब्लड कंपोनेंट यूनिट शुरू होने जा रही है।

ब्लड कंपोनेट सेपरेशन मशीन जिला चिकित्सालय में स्थापित हो गई है। एक यूनिट ब्लड से ब्लड के अव्यव जैसे प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और पैक्ड रेड ब्लड सेल अलग-अलग तैयार किये जा सकेंगे। एक यूनिट रक्त से अव्ययों की आवश्यकता के अनुसार 3 से 4 मरीजों का इलाज संभव हो सकेगा।

अस्थि रोग विभाग में सी-आर्म मशीन (सीएसआर फण्ड से प्राप्त) होने से आधुनिक पद्धति से हड्‌डी की जटिल सर्जरी होना सभव हुआ है। पहले मरीजों को बाहर भोपाल, इंदौर एवं झालावाड रेफर किया जाता था। आईपीएचएल के मापदंड अनुसार जिला चिकित्सालय के एकीकृत आधुनिक लैबोरेट्री का निर्माण कार्य जारी है।

जिससे समस्त प्रकार की जाचे जिला स्तर पर ही संभव हो सकेगी। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय में स्थित चार माड्यूलर ओटी में आवश्यक उपकरण की पूर्ति के साथ जिला स्तर पर ही जटिल सर्जरी होना शुरू हुआ है। जिससे मरीजों को प्राइवेट अस्पताल एवं जिले से बाहर रेफर होने की संख्या में कमी आई है।

पुरानी बिल्डिंग में स्थित सीटी स्कैन मशीन का नवीन जिला चिकित्सालय भवन में सुरक्षित स्थानांतरित कर पुनः स्थापित किया गया है। जिससे गंभीर मरीजों को एक भवन से दूसरे भवन आने-जाने में होने वाली असुविधा से निजात मिली है। अनावश्यक होने वाली सीटी स्कैन जाचों को लगभग 50 प्रतिशत की कमी लाकर शासन को वित्तीय वर्ष 2025-26 में वित्तीय लाभ पहुंचाया है।

जिला चिकित्सालय से संबद्ध एसएनसीयू पीआईसीयू एनआरसी, मेटरनिटी वार्ड एवं लेबर रूम का नवीन सीसीबी ब्लाक में स्थानांतरण कार्य चालू है। इस नवीन भवन में डीईआईसी ब्लाक का निर्माण भी किया गया है। जिससे विकलांग बच्चों को सुविधा का लाभ एक ही छत के नीचे प्राप्त होगा।

वर्तमान में नये चिकित्सक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर अंकुर देशवाली (पीडियाट्रिक सर्जन), डॉ. अदित अग्रवाल (अस्थि रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रतिभा वशिष्ठ (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रीति गुप्ता (शिशु रोग चिकित्सक) आदि द्वारा जिला अस्पताल में ज्वाइनिंग किया गया।

जिससे जिला अस्पताल में इलाज के लिये पहुंचाने वाले मरीजों को काफी लाभ पहुंचा है एवं रेफर की संख्या में भी कमी आई है।

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