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शाहपुरा में चरागाह भूमि पर अवैध गोशाला का मामला:खबर प्रकाशित होते ही हरकत में आया प्रशासनबिजली कनेक्शन काटा, फेंसिंग हटाने की कार्रवाई शुरू

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-ग्राम पंचायत माताजी का खेड़ा की चरागाह भूमि पर कथित अवैध गोशाला निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद विद्युत विभाग ने गोशाला का बिजली कनेक्शन विच्छेद कर दिया, वहीं प्रशासनिक अमले ने मौके पर…

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-ग्राम पंचायत माताजी का खेड़ा की चरागाह भूमि पर कथित अवैध गोशाला निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है।

मीडिया में मामला उजागर होने के बाद विद्युत विभाग ने गोशाला का बिजली कनेक्शन विच्छेद कर दिया, वहीं प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर की गई फेंसिंग हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

मामला शाहपुरा के केकड़ी मार्ग स्थित ग्राम पंचायत माताजी का खेड़ा की आराजी संख्या 2543 की कुल 78.68 हेक्टेयर चरागाह भूमि से जुड़ा है। इस भूमि में से पांच हेक्टेयर भूमि देव गोशाला सेवा संस्थान को आवंटित करने का प्रस्ताव भेजा गया था।

हालांकि, राजस्थान भू-राजस्व नियम, 1957 के तहत भूमि आवंटन के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होने पर जिला कलक्टर ने 25 फरवरी 2026 को आवेदन खारिज करते हुए फाइल बंद कर दी थी।

नियमों के अनुसार, संस्था का राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 के तहत वैध पंजीकरण, राजस्थान गोशाला अधिनियम, 1960 के अंतर्गत विधिवत रजिस्ट्रेशन और पिछले 3 वर्षों से गौशाला का निरंतर संचालन होना आवश्यक था।

प्रशासनिक जांच में संस्था इन शर्तों को पूरा करने में असफल पाई गई, जिसके चलते भूमि आवंटन से इनकार कर दिया गया।इसके बावजूद, मौके पर स्थिति बिल्कुल अलग पाई गई।

चरागाह भूमि पर देव गोशाला सेवा संस्थान का बोर्ड लगाकर पूरे क्षेत्र की तारबंदी कर दी गई थी। यहां तीन बड़े टीनशेड का निर्माण किया गया, बोरिंग खुदवाई गई और विद्युत कनेक्शन भी प्राप्त कर लिया गया।

बताया गया कि हर माह बिजली का बिल देव गोशाला सेवा संस्थान और चिनार देवतवाल के नाम से जारी हो रहा था।मामले का खुलासा तब हुआ जब चार माह पूर्व जारी प्रशासनिक आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसके बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे कि जब भूमि आवंटन का आवेदन खारिज कर दिया गया था, तो सरकारी चरागाह भूमि पर निर्माण कार्य और अन्य सुविधाएं कैसे विकसित हो गईं।जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि देव गोशाला सेवा संस्थान का आवेदन पात्रता पूरी नहीं होने के कारण नियमानुसार खारिज किया गया था।

अब मौके पर अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त हुई है। एसडीएम और तहसीलदार को वस्तुस्थिति की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।इधर, विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने पूरे मामले को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि चरागाह भूमि पर गौशाला संचालन को लेकर नियमों में संशोधन हुआ है और मवेशियों के संरक्षण के लिए गौशाला शुरू की जा सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने 10 अक्टूबर 2025 को संस्था से इस्तीफा दे दिया था तथा उनका और उनके परिवार का वर्तमान में संस्था से कोई संबंध नहीं है।

विधायक ने अपना त्यागपत्र भी मीडिया के समक्ष सार्वजनिक किया।फिलहाल प्रशासन ने बिजली कनेक्शन काटने और फेंसिंग हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि चरागाह भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण को पूरी तरह कब तक हटाया जाता है और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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