माता पिता के चरणों में ही समस्त तीर्थ-धाम, श्री शिव महापुराण कथा में गूंजा धर्म और संस्कार का संदेश

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा/शाहपुरा में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर कथावाचक गजेंद्र गोपाल जी शास्त्री ने भगवान गणेश की महिमा और माता-पिता की सेवा के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया।कथा के दौरान भगवान गणेश द्वारा माता-पिता की परिक्रमा किए जाने का प्रसंग सुनाते हुए शास्त्री जी ने कहा कि माता-पिता से बढ़कर कोई तीर्थ और धाम

नहीं है। भगवान गणेश ने माता-पिता को ही समस्त तीर्थों का स्वरूप मानकर उनकी परिक्रमा की और यह संदेश दिया कि माता-पिता की सेवा एवं सम्मान ही सर्वोच्च संस्कार है।उन्होंने कहा कि घर में माता-पिता कष्ट में हों और हम उनकी सेवा करने के बजाय तीर्थ यात्रा पर निकल जाएं, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता।

भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम भी प्रातःकाल उठकर सर्वप्रथम अपने माता-पिता को प्रणाम करते थे।कथा के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष रामलाल जाट, विधायक प्रत्याशी नरेंद्र रेगर, कांग्रेस विधानसभा प्रभारी रासा सिंह रावत, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महावीर कुमावत एवं नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सेन भी कथा स्थल पहुंचे।

उन्होंने कथा श्रवण किया तथा कथावाचक गजेंद्र गोपाल जी शास्त्री का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। “हर हर महादेव” और “जय शंभू” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।

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