प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
बिहार की पब्लिक लाइब्रेरी में कई तरह की अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहें हैं l दरभंगा में लालबाग़ लक्ष्मीश्वर सिंह पब्लिक लाइब्रेरी और लहेरियासराय का कमला नेहरू सार्वजनिक पुस्तकालय अरसे से बन्द हैं l
मधुबनी शहर में स्थित जिला केंद्रीय पुस्तकालय की हालत भी एकदम दयनीय हैं l वहीं दूसरी ओर मधुबनी जिले के राजनगर पब्लिक लाइब्रेरी पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप सामने आए हैं l ये लाइब्रेरी 1947 में बनी थी, और सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड हैं l
स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि वर्षों से लाइब्रेरी के नाम पर समाज के पैसो का दुरूपयोग हो रहा हैं l आय के कई स्रोत 21 दुकानों का किराया, शादी -विवाह तथा अन्य कार्यक्रमों में लाइब्रेरी को विवाह भवन में तब्दील कर हॉल -कमरों, परिसर का किराया, सरकारी सामाजिक सहयोग, हर महीने अच्छी आमदनी के बावजूद न किताबें हैं, न आधारभूत सुविधाएं l
सवाल यह हैं कि आखिर पैसा कहाँ जा रहा हैं ? बेहद चिंताजनक सवाल हैं कि पुस्तकालय को अध्ययन केंद्र बनाने के बजाय विवाह भवन, मनोरंजन स्थल और कमाई के साधन, शराब सेवन, अश्लील नृत्य, देर रात तक डी जे और बाल श्रम, रजिस्ट्रेशन शुल्क ( पहले 151 फिर 551 इसके बाद 151 ) में फेर बदल जैसे आरोप केवल नैतिक पतन का संकेत नहीं, बल्कि बॉयलॉज तथा कानून के घोर उल्लंघन का भी मामला हैं l
परिसर में शादी के मौकों पर शराब और अश्लील बार बालाओं का डांस मस्ती का चलन आम हैं l लेकिन यह खुशी और हंगामें के बीच एक पतली रेखा पर चलता हैं l यह जश्न का जरिया नहीं, बल्कि प्रांगण में हुड़दंग बाजी से शादियों में विवाद, झगडे और बदनामी की घटनाएं होती हैं l यह सामाजिक और कानूनी तौर पर भी संवेदनशील विषय हैं l
पिछले ग्यारह साल से विकास कार्य की बजाय सिर्फ़ औपचारिक बैठके हो रहीं हैं l आरोप हैं कि इन बैठकों में खाने पीने और मौज मस्ती पर ध्यान दिया जाता हैं l जबकि लाइब्रेरी की हालत ख़राब हैं l इसे सार्वजनिक धन का दुरूपयोग बताया जा रहा हैं l
नियम के अनुसार हर तीन साल में चुनाव होना चाहिए l लेकिन ग्यारह साल से अधिक वहीं लोग पदों पर जमे रहें l आरोप हैं कि कमेटी लोकतान्त्रिक तरीके से नहीं बनी l योग्य लोगों को नज़र अंदाज कर कुछ लोगों ने जबरन पद पर कब्ज़ा जमाया l सरकार की नई पहल के अनुसार अब हर पंचायत तथा वार्ड में पुस्तकालय बनाने की योजना हैं, ताकि शिक्षा और मनोरंजन की व्यवस्था हो सके l
कुल मिलाकर समस्या ये हैं कि राजनगर पब्लिक लाइब्रेरी में बजट तो आता हैं, पर रख रखाब नहीं होता l लाइब्रेरी पर कब्जे की कोशिश होती हैं l कहते हैं कि जिस समाज में लाइब्रेरी वीरान हो जाती हैं, वहाँ कब्रिस्तान तथा शमशान आबाद होने लगते हैं l राजनगर की पब्लिक लाइब्रेरी को देखकर यह कहावत सच लगती हैं l
चंद पैसो के प्रलोभन में पड़कर पब्लिक लाइब्रेरी को विवाह भवन में तब्दील करना कहाँ तक उचित हैं? विवाह भवन से समाज में दो दिनों की खुशी होती हैं, लाइब्रेरी से पीढ़ियों का भविष्य बनता हैं l
पूरानी लाइब्रेरी दम तोड़ रहीं हैं, और हम परिसर में लाखों का मंडप खड़ा कर रहें हैं l याद रखिए विवाह भवन से बेटी बिदा होती हैं, और लाइब्रेरी से बेटी डॉक्टर, इंजिनियर, साइंटिस्ट, बड़े – बड़े ऑफिसर बनती हैं l चुनाव आपको करना हैं ?















