डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश, 12 साइबर ठग गिरफ्तार

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17 राज्यों के 33 जिलों में देवास पुलिस की दबिश, 54.84 लाख रुपये की ठगी की राशि बरामद — 127 दिनों में 58,315 किमी का सफरसंवाददाता पवन परमार जिला देवास मध्यप्रदेश देवास। मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर फ्रॉड के विरुद्ध जारी नवाचारी पहल “ई-जीरो एफआईआर” के तहत

देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में 127 दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनसे जुड़ी कार्रवाई में कुल 54 लाख 84 हजार 725 रुपये की राशि जब्त की गई है।यह कार्रवाई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने तथा डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देशन एवं एडीजी राज्य साइबर मुख्यालय साई मनोहर के नेतृत्व में संचालित साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के क्रम में की गई।63.52 लाख की ठगी से खुला मामलाथाना

कोतवाली क्षेत्र के एक निवासी से अज्ञात साइबर ठगों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बताकर संपर्क किया। आरोपियों ने फरियादी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाया। इसके बाद फर्जी जांच

प्रक्रिया और वीडियो कॉल पर कथित न्यायालय का दृश्य दिखाकर उसकी एवं परिवार की बैंकिंग और निवेश संबंधी जानकारी हासिल की गई।जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा करवाकर ट्रांसफर कराई गई और फरियादी से कुल 63.52 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई।

शिकायत मिलने पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 192/2026, धारा 318(4), 316(2), 319(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।बैंकिंग ट्रांजेक्शन से पहुंची पुलिस ठगों तकप्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीजी उज्जैन जोन राकेश गुप्ता एवं डीआईजी उज्जैन रेंज नवनीत भसीन के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद ने विशेष पुलिस टीम गठित की।

तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) जयवीर सिंह भदौरिया, वर्तमान एएसपी गजेन्द्र सिंह वर्धमान तथा नगर पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कोतवाली श्यामचंद्र शर्मा के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ाई गई।पुलिस ने ठगी की रकम के बैंकिंग ट्रांजेक्शन, खाताधारकों, मोबाइल नंबर, बैंक स्टेटमेंट, बैंक सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।

बैंक खातों की प्रत्येक लेयर को ट्रेस करते हुए पुलिस अलग-अलग राज्यों में आरोपियों तक पहुंचती गई।17 राज्यों में 19 टीमों ने दी दबिशदेवास पुलिस की 19 टीमों में शामिल 70 पुलिसकर्मियों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल

, उत्तरप्रदेश, दिल्ली सहित कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी। इस दौरान बैंक शाखाओं, संदिग्धों के ठिकानों और अन्य स्थानों पर स्थानीय पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की गई।लगातार 127 दिनों तक चली इस अंतरराज्यीय कार्रवाई में पुलिस टीमों ने लगभग 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की। बैंक सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर

संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी जुटाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।12 आरोपी गिरफ्तारपुलिस कार्रवाई में राजस्थान के भूराराम राव, भालाराम मेघवाल और नाजिम खान, आंध्रप्रदेश के थोटकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा, मुकराला मेघा अविनाश और गिरीश कुमार येलेंटी, उत्तरप्रदेश के वैभव शुक्ला एवं आयुष गुप्ता, गुजरात के केयूर

कुमार, पश्चिम बंगाल के कमल कांति, बिहार/दिल्ली निवासी मोहम्मद अब्दुल्ला तथा कर्नाटक के अनिल कुमार को गिरफ्तार किया गया।आरोपियों से अलग-अलग कार्रवाई में 20 हजार रुपये से लेकर 21 लाख रुपये तक की राशि सहित कुल 54,84,725 रुपये जब्त किए गए। इसके अलावा अनिल कुमार से चेकबुक, एटीएम और मोबाइल भी बरामद किया

गया।पुलिस की नागरिकों से अपीलदेवास पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर संपर्क करे और गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अपराध में फंसाने का भय

दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो घबराएं नहीं।किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें अथवा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें।कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े:70 पुलिसकर्मी | 19 टीमें | 12 आरोपी गिरफ्तार | ₹54,84,725 जब्त | 17 राज्य | 33 जिले | 127 दिन | 58,315 किमी

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