राजनगर का चौहरा खेल: एक तरफ 8,96,306 का सड़क-नाला घोटाला,
दूसरी तरफ 1947 की लाइब्रेरी और 1931 की नाट्य परिषद के 63 साल के हिसाब पर ताला
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार बिहार के मधुबनी जिला का राजनगर एक समय मिथिला नरेश का राजधानी हुआ करता था। उसी राजनगर बाजार में दो ऐसी संस्थाएं आज भी मौजूद हैं जिनकी उम्र इस देश की आजादी से भी ज्यादा है।
पहली है,राजनगर पब्लिक लाइब्रेरी, जिसकी स्थापना 1947 को हुई थी और जो सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत निबंधन संख्या 235 पर निबंधित है। दूसरी है उसी लाइब्रेरी के आंगन में संचालित सेवा समाज नाट्य परिषद, जिसकी स्थापना 1931 में हुई थी और जो निबंधन संख्या 28/63-64 पर निबंधित है।
आजादी के 79 साल बाद इन दोनों ऐतिहासिक संस्थाओं की जमीन पर जो खेल हुआ है, उसने पूरे राजनगर प्रखण्ड की विकास की कहानी पर सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में ग्रामीण कार्य विभाग, मधुबनी द्वारा यहाँ सड़क और नाला के नाम पर जो काम दिखाया गया है, वह कागज पर कुछ और है और जमीन पर कुछ और।
इसी फर्जीवाड़े को उजागर करने के लिए प्रदीप कुमार नायक, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, ने 24 अगस्त 2026 को एक साथ 4 RTI आवेदन दायर किए हैं, जो अपने आप में राजनगर के 4 बड़े घोटालों का कच्चा चिट्ठा है। घोटाला नंबर 1 और 2: RTI नंबर 1 – चट्टी रोड से गांधी चौक तक एक सड़क और दो नाला का खेल – 5 बिंदु
यह सबसे बड़ा और सबसे चालाक घोटाला है। इस RTI को ध्यान से समझना जरूरी है क्योंकि इसमें एक सड़क और दो नाला का मामला है। सरकारी रिकॉर्ड में योजना का नाम है – राजनगर चट्टी रोड से गांधी चौक तक PCC सड़क निर्माण। लेकिन जमीन पर जाकर देखने पर दो अलग-अलग नाले बने हुए मिलते हैं
पहला नाला: जो सड़क के साथ-साथ बनना था, उसे सड़क के बीच में ही काट कर बना दिया गया है, जिससे सड़क की गुणवत्ता और मजबूती दोनों खत्म हो गई है।
दूसरा नाला: जो सबसे ज्यादा विवादित है, वह है पब्लिक लाइब्रेरी के बगल होकर बनाई गई दूसरी नाला। यह नाला सरकारी नक्शे में है ही नहीं। यह लाइब्रेरी की सरकारी जमीन पर, पुराने सरकारी नाले को बीच से तोड़ कर अवैध तरीके से बनाई गई है, ताकि लाइब्रेरी की जमीन पर कब्जा किया जा के।इस RTI में 5 बिंदुओं पर सूचना मांगी गई है:
1. इस सड़क और दोनों नालों का मूल एस्टीमेट, कार्यादेश और तकनीकी नक्शा की सत्यापित प्रति दी जाय।2. सड़क के बीच में नाला और लाइब्रेरी के बगल वाली दूसरी नाला को किसके आदेश से और किस तकनीकी कारण से बनाया गया? इसकी सक्षम पदाधिकारी की अनुमति पत्र दी जाय।
3. इस सड़क और दोनों नालों का निर्माण किस एजेंसी/ठेकेदार को दिया गया? उसका नाम-पता, Completion Certificate और भुगतान की तिथि व राशि दी जाय।4. राजनगर प्रखंड की कुल 87 सड़कों की जो जांच हाल में हुई थी, क्या इस फर्जी
सड़क और लाइब्रेरी बगल वाली दूसरी नाला का नाम उस जांच रिपोर्ट में शामिल है? जांच रिपोर्ट की प्रति दी जाय।5. लाइब्रेरी की सरकारी जमीन पर दूसरी नाला और पुराने सरकारी नाला को तोड़ कर अवैध नाला बनाने की कोई अनुमति विभाग द्वारा दी गई है या नहीं? उसका पूरा तकनीकी प्रतिवेदन और
भुगतान की छायाप्रति दी जाय।*विश्लेषण:* अगर दूसरी नाला का कोई एस्टीमेट और अनुमति नहीं है, तो यह 100% अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जा है। *घोटाला नंबर 3: RTI नंबर 2 – गांधी चौक से लाइब्रेरी पीछे 8,96,306 रुपये का तीसरा नाला घोटाला – 9 बिंदु, 2 पेज
दूसरा RTI तो सीधे सरकारी खजा ने की लूट का दस्तावेज है। गांधी चौक से पूरब लाइब्रेरी के पीछे PCC सड़क एवं नाला निर्माण के लिए ग्रामीण कार्य विभाग, मधुबनी द्वारा 8,96,306 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
लेकिन हकीकत यह है कि गांधी चौक से पूरब लाइब्रेरी के पीछे कोई सड़क बनी ही नहीं है, सिर्फ लाइब्रेरी के आंगन में एक अधूरा नाला बना कर छोड़ दिया गया है।
इसमें 9 बिंदुओं पर बम फोड़ा गया है:
1. इस 8,96,306 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति और विस्तृत प्राक्कलन की प्रति दी जाय।2. अब तक कितनी राशि निकली है? निकासी की तिथि, बिल नंबर और भुगतान की जानकारी दी जाय।3. कार्यादेश किस एजेंसी को दिया गया? कार्यादेश और एग्रीमेंट की कॉपी दी जाय।4. मापी पुस्तिका (MB Book) की प्रमाणित कॉपी दी जाय जिसमें लंबाई-चौड़ाई और कार्य स्थल का विवरण हो।5. कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी हुआ है तो उसकी कॉपी दी जाय।6. पत्रिका में वर्णित स्थान के बजाय लाइब्रेरी आंगन में नाला किसके आदेश पर और किस योजना से बनाया गया?
उसकी स्वीकृति दी जाय।7. वर्तमान में लाइब्रेरी के पीछे जो नाला बन रहा है वो किस फंड/योजना/वित्तीय वर्ष से बन रहा है? उसका नाम, राशि और कार्यादेश दी जाय।8. इस योजना का निरीक्षण किस पदाधिकारी ने किया? निरीक्षण रिपोर्ट दी जाय।9. गलत स्थान पर कार्य को लेकर जो शिकायत मिली उस पर क्या कार्रवाई हुई?
विश्लेषण:
एक ही लाइब्रेरी के चारों तरफ तीन-तीन नालों के नाम पर पैसा – चट्टी रोड वाला नाला, लाइब्रेरी बगल वाली दूसरी नाला, और लाइब्रेरी पीछे वाला 8,96,306 वाला तीसरा नाला। यह पैसों का डायवर्सन है। *घोटाला नंबर 4 (क): RTI नंबर 3 – पब्लिक लाइब्रेरी 1947 का 15 साल का हिसाब गायब – 5 बिंदु
जब जमीन पर ही तीन-तीन नाले अवैध तरीके से बना दिए गए तो उसकी मालिक संस्था का हिसाब कैसे मिलेगा? यह RTI 1860 एक्ट के तहत निबंधित लाइब्रेरी संख्या 235 से 5 सवाल पूछता है:1. निबंधन प्रमाण-पत्र, नियमावली, स्मृति पत्र की मोहर लगी कॉपी दो।2. वर्तमान कार्यकारिणी समिति की सूची दो।3. भूमि, भवन और उपस्कर (फर्नीचर-सामान) का पूरा ब्यौरा दो।4. भवन और भूमि से प्रतिवर्ष कितनी आय आती है, उसका ब्यौरा दो।5. पिछले 15 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी दो।
विश्लेषण:15 साल से ऑडिट रिपोर्ट का गायब होना यह साबित करता है कि लाइब्रेरी की दुकानों और जमीन से जो लाखों रुपये सालाना किराया आता है, वह कहाँ जाता है, इसका कोई हिसाब नहीं है। *घोटाला नंबर 4 (ख): RTI नंबर 4 – सेवा समाज नाट्य परिषद 1931 का 63 साल का काला चिट्ठा – 6 बिंदु*
यह सबसे पुरानी संस्था है और यह लाइब्रेरी के आंगन में ही चलती है। 1931 से 2026 तक का हिसाब मांगा गया है, लेकिन RTI में विशेष तौर पर पिछले 63 साल का वित्तीय हिसाब गायब होने का जिक्र है।इसमें 6 बिंदु हैं:1. 1931 से 24.08.2026 तक मिले सभी सरकारी अनुदान, चंदा, दान और अन्य आय का वर्षवार हिसाब दो।2. पुराने भवन की ईंट, लकड़ी, लोहा और फुटकर सामान बेच कर जो पैसा आया उसका मदवार ब्यौरा दो।3. पिछले 10 साल की
ऑडिट रिपोर्ट और आय-व्यय का प्रमाणित विवरण दो।4. वर्तमान कार्यकारिणी, पदाधिकारियों और कर्मचारियों की सूची दो।5. अचल सम्पति – जमीन, भवन, सामान का विवरण दो।6. 10 वर्षों में कौन-कौन से कार्यक्रम हुए और उस पर कितना खर्च हुआ, उसका विवरण दो।*विश्लेषण:* नाट्य परिषद के पुराने ऐतिहासिक भवन को तोड़ कर उसकी ईंट,
लकड़ी, लोहा बेच दिया गया, पर वह पैसा किस खाते में गया? और 1961 के बाद से इसका कोई वार्षिक लेखा-जोखा क्यों नहीं है? *निष्कर्ष: चारों RTI का एक ही तार*प्रदीप कुमार नायक, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार द्वारा दायर चारों RTI एक ही साजिश की तरफ इशारा करते हैं,पहले सरकारी पैसा
(8,96,306 रुपये) के नाम पर फर्जी सड़क और दो अवैध नाले बनाओ, फिर उन नालों को 1947 की लाइब्रेरी और 1931 की नाट्य परिषद की कीमती सरकारी जमीन पर बना कर जमीन पर कब्जा करो, और फिर उन दोनों संस्थाओं के 63 साल और 15 साल के अनुदान, किराया और संपत्ति बिक्री के करोड़ों रुपये के हिसाब को गायब कर दो ताकि कोई सवाल न पूछ सके।
अब ग्रामीण कार्य विभाग, मधुबनी और जिला लोक सूचना कोषांग, मधुबनी को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 30 दिनों के अंदर इन चारों RTI का जवाब देना है। अगर जवाब नहीं आता है या गोल-मटोल जवाब आता है तो पहला अपील, दूसरा अपील और फिर लोकायुक्त बिहार तक मामला जाएगा।
यह सिर्फ 4 RTI नहीं, बल्कि राजनगर के इतिहास, सरकारी जमीन और सरकारी खजाने को बचाने की एक बड़ी लड़ाई है।