सुसनेर में दबंगई! आदिवासी महिला के लहसुन के खेत में जबरन ट्रैक्टर चलाया; कैलाश बजाज पर ज़मीन हथियाने और जान से मारने की धमकी के आरोप
आगर मालवा। जिले के सुसनेर क्षेत्र में दबंगों के हौसले बुलंद हैं। एक गरीब और असहाय आदिवासी परिवार की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा करने और उन्हें बार-बार जान से मारने की धमकियां देने का एक गंभीर मामला सामने आया है।
पीड़िता ममता बाई (पति भगवान सिंह) ने कैलाश बजाज और उनके अन्य साथियों पर उनके लहसुन के खेत में जबरन ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट करने और दबंगई दिखाने का आरोप लगाया है।अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा तथा इंसाफ की गुहार लेकर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक (SP Office, आगर मालवा) के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।2 सालों से जारी है दादागिरी,
परिवार दहशत मेंपीड़िता ममता बाई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कैलाश बजाज पिछले दो वर्षों से लगातार उन पर और उनके परिवार पर मानसिक व शारीरिक दबाव बना रहा है। आरोप है कि कैलाश बजाज आदिवासी परिवार की कीमती ज़मीन को अवैध रूप से हथियाने की नीयत से बार-बार उनके परिवार को जान से मारने की कोशिश और धमकियां दे रहा है।
हम पिछले दो सालों से खौफ के साए में जी रहे हैं। दबंग हमारी ज़मीन छीनना चाहते हैं और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हैं।”— पीड़ित परिवारपहले भी दिए गए आवेदन, नहीं थमा दबंगों का कहरपीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इससे पहले भी पुलिस प्रशासन को अपनी आपबीती बताते हुए आवेदन दिया था, लेकिन दबंगों के खिलाफ ठोस
कार्रवाई न होने के कारण उनके हौसले और बुलंद हो गए हैं। हाल ही में खेत में तैयार हो रही लहसुन की फसल पर जबरन ट्रैक्टर चलाकर दबंगों ने न केवल भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि खुलेआम चुनौती भी दी है।पुलिस और सरकार से न्याय व सुरक्षा की गुहारलगातार मिल रही धमकियों और
ज़मीन पर हो रहे हमलों से परेशान पीड़ित आदिवासी परिवार अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। परिवार ने एसपी ऑफिस आगर मालवा, पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार से नम्र निवेदन करते हुए गुहार लगाई है कि:आरोपी कैलाश बजाज एवं उसके सहयोगियों पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित आदिवासी परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।पीड़ित परिवार की ज़मीन पर दबंगों के अवैध हस्तक्षेप को तुरंत रुकवाया जाए।अब देखना यह होगा कि सुसनेर पुलिस और जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी त्वरित कार्रवाई करता है और पीड़ित आदिवासी परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।