रौशन हत्याकांड में सीएम सचिवालय की एंट्री, समाजवादियों ने दी महाआंदोलन की चेतावनी

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प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं मधुबनी में जहाँ एक तरफ मीडिया संवाद और पाग-दोपट्टा सम्मान समारोह हो रहे हैं, वहीं जमीन पर जनता के सवाल ज्यों के त्यों खड़े हैं। इन्हीं सवालों में सबसे बड़ा सवाल है — राँटी जेल में 19 वर्षीय युवक रौशन यादव की रहस्यमय मौत का।

इस मामले में अब एक बड़ा मोड़ आया है। हमारे हाथ लगा पत्र संख्या 5542364 / मु०मं०स०, दिनांक 21/09/26 बताता है कि यह मामला सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंच गया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने 10.08.2026 को ई-मेल से इस संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव अभिषेक श्रीवास्तव ने प्रधान सचिव, गृह विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मामले की छानबीन कर समुचित निर्णय लिया जाए और की गई कार्रवाई से पूर्व मंत्री तथा मुख्यमंत्री सचिवालय को अवगत कराया जाए।

इसका QR कोड 2026062492 के रूप में सरकारी डैशबोर्ड पर भी दर्ज है। मतलब साफ है, रौशन हत्याकांड अब केवल फुलपरास या मधुबनी का मामला नहीं रहा, यह पटना सचिवालय तक गूंज चुका है।

इधर, 23 सितंबर 2026 को लोहिया आश्रम, फुलपरास में पूर्व विधायक रामकुमार यादव की अध्यक्षता में समाजवादी कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में पूर्व विधायक सीताराम यादव, राजेश सिंह, प्रो. औसाफ लड्डन, राजेश यादव, समाज सेवी आजाद गुप्ता,राम अशिष यादव, रामेश्वर भारती सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बैठक में गंभीरता से विचार के बाद तय किया गया कि रौशन हत्याकांड, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, रोजगार-महंगाई-अपराध- भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध जिला स्तर पर एक विशाल, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन-महाधरना पर्व-त्योहार के बाद किया जाएगा। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि आज सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे

बुनियादी मुद्दों पर गंभीर नहीं दिखती। धार्मिक मुद्दों और जातीय गोलबंदी को राजनीति में लाकर प्रदेश को बर्बादी के कगार पर ले जाया जा रहा है। खुदगर्ज नेताओं ने बिहार को गर्त में डाल दिया है। सियासत अब जनसेवा का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता, सुख-सुविधा और धन प्राप्ति का साधन बन गई है, यहाँ तक कि छात्राओं और महिलाओं का घर से बाहर निकलना दुर्लभ हो गया है।

यह बैठक सिर्फ जन-संघर्ष का आह्वान ही नहीं, बल्कि संकल्प है कि कुन्द पड़ चुके समाजवादी आंदोलन को फिर से जागृत किया जाएगा और बुनियादी समस्याओं के समाधान तथा न्याय हेतु निरंतर आंदोलन चलाया जाएगा।

अब सवाल वही है जो हम पहले से पूछ रहे हैं — हमें पाग-दोपट्टा और दिन के भोज का सम्मान नहीं, जवाब चाहिए।

जनप्रतिनिधि से जवाब चाहिए कि बंद पड़ी लोहट (1914, 225 एकड़), सकरी, रैयाम चीनी मिल और अशोक पेपर मिल कब चालू होंगी? बाढ़ का स्थायी हल क्या है? और सबसे बड़ा सवाल — राँटी जेल में रौशन की मौत का जिम्मेवार कौन है?

गणेश शंकर विद्यार्थी ने कहा था — कलम सत्ता से सवाल पूछने के लिए है, माला पहनने के लिए नहीं। पत्रकारिता का असली सम्मान मंच से नहीं, जनता के दिल से मिलता है।

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