दतिया कोर्ट का बड़ा फैसला बगैर वारंट घर में घुसकर महिलाओं एवं बच्चों से मारपीट करने के आरोप पर SHO अरविंद भदौरिया सहित 4 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश।

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दतिया। दतिया की अदालत ने खाकी को शर्मसार करने वाले एक बेहद गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सिनावल थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद भदौरिया सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विजिताश्व पुष्कर की अदालत ने कोतवाली पुलिस को यह आदेश दिया है कि वह इन पुलिसकर्मियों पर घर में जबरन घुसने (धारा 452) और मारपीट (धारा 323) के तहत मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच करें।

क्या था पूरा मामला? शिकायतकर्ता युवराज सिंह बुंदेला (निवासी ग्राम रावरी, हाल किराएदार राजघाट कॉलोनी, दतिया) ने अदालत में धारा 156(3) crpc के तहत आवेदन लगाया था और शिकायत के अनुसार, 27 मार्च 2024 को होली दोज के दिन जब युवराज अपने घर में माँ, बुआ, बुआ के लड़के और बहनों के साथ मौजूद थे, तभी तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद भदौरिया, हेड कांस्टेबल पुष्पराज, कांस्टेबल कपिल शर्मा और महिला कांस्टेबल पूजा सिकरवार 8-10 अन्य पुलिसकर्मियों के साथ बिना किसी वारंट के उनके घर में जबरन घुस गए।

पुलिस कर्मियों ने घर में घुसते ही अश्लील गालियां दीं और कमरों, बाथरूम के दरवाजों में लाते मारी। जब पीड़ित की माँ ने विरोध किया तो SHO अरविंद भदौरिया ने युवराज सहित उनकी मारपीट की। जब महिलाओं ने इस गुंडागर्दी का वीडियो बनाना चाहा, तो पुलिस ने उनके मोबाइल फोन छीन लिए और परिवार पर लाठियों, लातों और घूसों की बरसात कर दी। हमले में युवराज की माँ के सिर पर लाठी लगने से वे लहूलुहान हो गईं। पुलिस ने बाद में फोन वापस करने से पहले वीडियो रिकॉर्डिंग भी डिलीट कर दी और पीड़ितों पर ही झूठा केस लाद दिया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि क्या पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई के लिए धारा 197 crpc के तहत सरकारी मंजूरी की जरूरत है? इस पर कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए अपने आदेश में लेख किया कि — “बिना वारंट के किसी के निजी घर में घुसना, महिलाओं और मासूम बच्चों को बेरहमी से पीटना और उनके मोबाइल छीनना, किसी भी संवैधानिक या कानूनी तर्क से ‘सरकारी कर्तव्य का निर्वहन’ नहीं माना जा सकता।

यह पुलिस की शक्ति का दुरुपयोग और नागरिकों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 और 22) का खुला उल्लंघन है। इसके लिए किसी सरकारी मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं है।” कोतवाली CCTV की जब्ती और फोरेंसिक जांच के निर्देश अदालत ने माना कि इस मामले में पुलिस जांच बेहद जरूरी है क्योंकि कोतवाली थाने के उस दिन के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को जब्त करना है और साइबर सेल के जरिए मोबाइल से डिलीट किए गए वीडियो साक्ष्यों को रिकवर करना है।

कोर्ट ने एसपी दतिया और कोतवाली थाना प्रभारी को आदेश की प्रति भेजते हुए 16 जून 2026 तक एफआईआर की कॉपी कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी चेताया है कि आदेश का पालन न होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

फरियादी की ओर से जिला अभिभाषक संघ अध्यक्ष शिवराज सिंह जाट, पूर्व जिला अभिभाषक संघ अध्यक्ष महिपाल सिंह, विवेक सिंह जाट, शुभम सिंह अधिवक्तागण द्वारा पैरवी की गई।

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