कुदऊँ सिंह महान संगीतज्ञ थे, उनकी स्मृति को संजोए रखना जरूरी-अरुणादित्य देवसंस्कार भारती ने किया कुदऊँ सिंह संगीत समारोह का आयोजन

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दतिया। कुदऊँ सिंह जी बिख्यात पखावज वादक एवं महान संगीतज्ञ थे, उनकी संगीत साधना बहुत विलक्षण थी, उन्होंने ‘गजपर्ण’ का अविष्कार किया, जिससे वह पागल हाथी को वश में कर लेते थे। वह दतिया महाराज भवानी सिंह (1857-1907 )के नव रत्नों में से एक थे। यह विचार महाराजा अरुणादित्य देव जूदेव ने बतौर विशिष्ट अतिथि रविवार को संस्कार भारती, दतिया द्वारा श्री अवध बिहारी मंदिर में

आयोजित अखिल भारतीय कुदऊँ सिंह संगीत समारोह में उपस्थित गणमान्य जनों को संबोधित कर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कुदऊँ सिंह जी की स्मृतियों को संजोए रखने के लिए संस्कार भारती द्वारा आयोजन किया जाना सराहनीय कार्य हैं। कार्यक्रम के आरंभ में उन्होंने कुदऊँ सिंह जी चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम में

मुख्य अतिथि के रूप में सेंवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल उपस्थित रहे, अध्यक्षता डॉ निलय गोस्वामी प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय, इंदरगढ़ ने की। कार्यक्रम में संगीत कलाकारडॉ. ब्रजभूषण गोस्वामी (ध्रुपदगायक, दिल्ली),(मृदंगाचार्य, अयोध्या) पं. श्री विजयरामदास, पं. श्री वैभव (पखावज, मुम्बई), डॉ. श्याम रस्तोगी (सितार, बनारस), उस्ताद अब्दुल हमीद (सारंगी, ग्वालियर) आदि ने संगीत की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को आनन्दित किया।

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