स्वतंत्रता/रक्षाबंधन विषय पर साहित्यिक गोष्ठी संपन्न

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।शाहपुरा-

अखिल भारतीय साहित्य परिषद शाहपुरा की मासिक साहित्यिक गोष्ठी केशव प्रन्यास भवन संघ कार्यालय शाहपुरा में तेजपाल उपाध्याय की अध्यक्षता व परमेश्वर कुमावत ‘परम’ के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुई।गोष्ठी की शुरुआत परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने परिषद गीत “भारती की लोकमंगल साधना साकार हो” से की।

‘परम’ ने “सामाजिक समरसता का अभियान हमारी राखी है” कविता सुनाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। गोपाल लाल पंचोली ने “हाथों में सरिया लाठी ले उत्पात मचा रहे हो” रचना के माध्यम से आजादी के नाम पर उपद्रव मचाने वालों पर कड़ा प्रहार किया। सोमेश्वर व्यास ने हास्य व्यंग्य की रचना “गरीबदास ने मुझे चाय पर बुलाया”

सुनाकर सभी को हँसाया। डॉ कमलेश पाराशर ने “राम को छोड़कर तुम कहां जाओगे जहां जाओगे वहीं राम को पाओगे” तथा “80वा स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं क्या खो रहे हैं क्या पा रहे हैं यह नहीं बता रहे हैं” रचनाएं सुनाई। ओम माली ‘अंगारा’ ने “पूरे दिवस प्रतीक्षारत व्याकुल रजनी करती रही इंतजार प्रियतम चंद्र का” तथा “भारत मां तेरे चरणों में अर्पण हो जीवन हमारा” रचनाएं सुनाई।

गोविंद सिंह बड़गुर्जर ने “मेरी प्यारी भारत मां तेरी जय जय जय हो” तथा “आजादी का जश्न मनाने से घर-घर तिरंगा फहराने से क्या सचमुच में आजादी आई है” रचनाएं सुनाई। तेजपाल उपाध्याय ने कहा “देश आजाद होते ही बलिदानियों के स्वप्न को

भुलाकर सत्ताधारी लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति में लग गए तथा भारतीय साहित्य के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को ना बदलकर मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को लागू रखा। अब उन बलिदानियों के स्वप्न को साकार करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था में और सामाजिक व राजनितिक परिस्थितियों में बदलाव करना जरूरी है।”गोष्ठी की समीक्षा परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने की।

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