शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। उपरेड़ा-भारत का एक जिम्मेदार नागरिक और मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले आम नागरिक ने हमारी भारतीय संस्कृति, सभ्यता और कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में गाय का अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय स्थान बताया है। गाय को हिंदू धर्म में ‘गौमाता’ माना जाता है।
यह न केवल उनकी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संरक्षण में भी इसकी अहम् भूमिका है।गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने से न केवल गौवंश की रक्षा होगी, बल्कि प्राचीन भारतीय मूल्यों को भी बढ़ावा मिलेगा ओर सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने पर कत्ल खानो और गायों को बचाया जा सकेगा। आए दिन गाय के नाम पर लड़ाई झगड़ा और अन्य मामलों में भी रोकथाम लगेगी। हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कायम होगा वसुदेव कुटुंबकम की भावना स्थापित होगी और व्यवस्था नफरत का माहौल खत्म होगा।
इस संदर्भ में राजस्थान प्रदेश की भीलवाड़ा जिले के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मुबारिक मंसूरी (उपरेडा )ने समाचार पत्र को जानकारी देते हुए। बताया कि उनके द्वारा एवं संपूर्ण राजस्थान प्रदेश मंसूरी समाज द्वारा भी पिछले लगातार 5 वर्ष से सैकड़ो पत्राचार जिला कलेक्टर भीलवाड़ा संभागीय आयुक्त महोदय अजमेर पशुपालन मंत्री राजस्थान सरकार जयपुर मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार जयपुर फार्म एवं राज्यपाल राजस्थान सरकार जयपुर केंद्रीय गृहमंत्री केंद्रीय पशुपालन मंत्री प्रधानमंत्री महोदय को लिखित में निवेदन कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने हेतु निवेदन किया है।
साथ ही जहां भी गौशालाएं हैं उनका रोजगार हो और गौशाला में चारा पानी पानी की व्यवस्था हेतु सरकार द्वारा प्रबंध किया जाए ताकि यह समय कल का ग्रास होने वाली गायों को बचाया जा सके। इसके अलावा जो व्यक्ति गायों की हत्या करता है सरकार द्वारा कानून बनाकर गौ हत्या करने वाले अपराधी व्यक्ति प्रवृत्ति के लोगों को मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया जाए और गांव-गांव में सतर्कता समिति का गठन किया जाए जिससे जानवरों की स्थिति का भी आकलन किया जा सके।
इसके अलावा जो किसान भाई गायों का पालन करते हैं उनके लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद की जाए ताकि पशुपालन को बढ़ावा मिल सके,अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि जनभावनाओं और भारतीय संस्कृति के सम्मान में गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की कृपा करें।















