शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।सहाड़ा, भीलवाड़ा-पंचायत समिति सहाड़ा के ग्राम सालेरा की दलित एवं आदिवासी बस्तियों में लंबे समय से व्याप्त कीचड़, गंदगी और जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर के तहसील अध्यक्ष ज्ञानचंद खटीक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि बस्तियों की गलियों और रास्तों में गंदा पानी जमा रहने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर रास्ते पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में स्थिति और अधिक विकट होने की आशंका है। जलभराव एवं गंदगी के कारण मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड सहित अन्य मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। दलित एवं आदिवासी बस्तियों में निवास करने वाले गरीब परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति निराशा बढ़ रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बस्तियों का तत्काल निरीक्षण करवाकर जलभराव एवं कीचड़ हटाने, नालियों की सफाई कराने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, फॉगिंग एवं मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराने तथा स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए जाएं।
साथ ही ग्रामीणों ने भविष्य में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पक्की नालियों एवं सड़कों के निर्माण की स्वीकृति देने की भी मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो उन्हें जनआंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
ज्ञापन में ज्ञानचंद खटीक डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर, मुकेश सालवी रायपुर, राजकुमार रेगर, दिव्यांश बोरीवाल, नारायण लाल जैलिया बोराणा, भैरु लाल रेगर, उदयलाल भील,प्रकाश खटीक लोकेश सैन,आदी लोग मौजूद रहे “दलित एवं आदिवासी बस्तियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर ग्रामीणों को राहत प्रदान करनी चाहिए।”















