जिसे राम से प्यार होगा उसे संसार ओर शरीर खारा लगेगा- आचार्य रामदयाल जी महाराजज्ञान की सर्वोच्च अवस्था का नाम संत होता है,

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गृहस्थ जीवन में रहकर भी कर सकते संत जैसी साधनामाणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

भीलवाड़ा/जिसको संसार व शरीर से प्यार है उसे राम प्यारा नहीं हो सकता ओर जिसे राम प्यारा है उसे ये संसार ओर शरीर खारा लगेगा। कठिन से कठिन बात को जिसे सरल तरीके से कहा गया हो उसे स्वामी रामचरण जी महाराज की अनुभव वाणी कहते है। उनकी वाणी में सभी शास्त्रों का सार समाया हुआ है। उनकी वाणी जीवन को बदल देती है।

इससे बचपन बदल जाता है, जवानी संवर जाती है ओर बुढ़ापा चिंतन का अमृत पाकर सत्यम शिवम सुन्दरम बना लेता है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्री रामदयाल जी महाराज ने ‘‘विश्व शांति

कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरण जी की वाणी सरल,सुगम व सहज है जिसे कोई भी समझ सकता है। बिना भजन जन्म मरण के बंधन से मुक्ति नहीं मिलेगी। राम का उपासक बन जो मन से उनका भजन करता है उसके पास अखण्ड एश्वर्य होता है।

आचार्य श्री ने कहा कि हम सभी अपनी मति के अनुसार जीवन की गति कर रहे है। राम-राम करने से ही आत्मानंद की प्राप्ति हो सकती है ओर ऐसा आनंद प्राप्त करने वाले विरले ही होते है। हमारी सत्संग के प्रति अभिरूचि बढ़े तो जीवन सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि संसार सम्मान देने में देर नहीं करता तो अपमान का घूंट पिलाने में भी देर नहीं करता।

अपने जीवन को राममय बनाने का लक्ष्य रखे। संत का अर्थ किसी वेश से नहीं होता, ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था का नाम संत होता है। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा शहर में ही कई ऐसे ज्ञानीजन है जिनका वेश संत का नहीं पर ज्ञान में किसी संत से कम नहीं है। कई गृहस्थ ऐसे होते जिनकी साधना के समक्ष संत भी कुछ नहीं होते।

उनके आहार,विहार, बोलने, बैठने में भी संयम होता है वह गृहस्थ में रहकर भी संयमी जीवन जीते है यानि काजल की कोठरी में रहकर भी बेदाग जीवन जीते है। ऐसे गृहस्थ संत से भी उंचे होते है ओर भजन में रमे रहकर लोक दिखावे में भी विश्वास नहीं करते है। आचार्य श्री के प्रवचन से पूर्व रामस्नेही सम्प्रदाय के वरिष्ठ संत नरपत राम जी उदयपुर ने भी धर्म संदेश प्रदान किया।

प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्य श्री रामदयाल जी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।एकादशी के अवसर पर रामस्नेही संप्रदाय के प्रथम आचार्य वीतराग महाराज श्री रामजन्न जी महाराज की वाणीजी पाठ दोपहर 3 से 4 बजे तक रामद्वारा में होंगा।

चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

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