महर्षि दयानंद के राष्ट्रीय चिंतन और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

IMG-20260813-WA0009

शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा विशिष्ट अतिथि के रूप में हुए शामिल, शोधार्थियों को किया संबोधित

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा/महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में ‘महर्षि दयानंद सरस्वती का राष्ट्र चिंतन और स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि निर्माण में योगदान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (वेबिनार/कार्यक्रम) का गरिमामय आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी में शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विषय पर अपना गहन मंतव्य रखते हुए विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, प्रबुद्ध शिक्षाविदों और समस्त प्रबंधन को संबोधित किया।

स्वतंत्रता आंदोलन में महर्षि दयानंद का वैचारिक योगदान अतुलनीय: डॉ. बैरवासमारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती केवल एक सामाजिक और धार्मिक सुधारक ही नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के प्रथम राष्ट्र-चिंतक थे।

उन्होंने ‘स्वदेशी’, ‘स्वधर्म’ और ‘स्वराज’ का जो मंत्र दिया, उसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक आधारशिला रखी। डॉ. बैरवा ने उपस्थित शोधार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि महर्षि के राष्ट्र प्रथम के विचारों को आज के संदर्भ में और अधिक शोध तथा प्रसार की आवश्यकता है।

मंच पर उपस्थित प्रबुद्ध जन, संगोष्ठी में कई शीर्ष विद्वान और मुख्य वक्ता उपस्थित रहे:* कार्यक्रम के अध्यक्ष: कुलपति प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल मदस अजमेर विश्वविद्यालय* मुख्य वक्ता: डॉ. गोपाल बहेती, पूर्व विधायक-पुष्कर * प्रखर वक्ता: आचार्य अंकित प्रभाकर* मुख्य वक्ता प्रोफेसर ऋतु माथुर, निदेशक, महर्षि दयानंद शोध पीठ*

उपस्थिति: कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध शिक्षाविद्, शोध विद्यार्थी और प्रबंधन तंत्र के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। यह संगोष्ठी वैचारिक रूप से अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायी रही।

About The Author