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प्रत्यक्ष लाभान्तरण विधि (डीबीटी) से वितरित की जाएँगी स्कूटियाँ, एबीआरएसएम के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता: नोडल महाविद्यालयों का कम होगा भार

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-राज्य के महाविद्यालयों में अध्ययनरत मेधावी छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए चल रही कालीबाई भील व देवनारायण छात्रा स्कूटी योजनाओं के अन्तर्गत स्कूटी वितरण का कार्य अब प्रत्यक्ष लाभान्तरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, डीबीटी) विधि से होगा। लाभान्वित मेधावी छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए इस प्रक्रिया में स्कूटियों के लिए वित्त विभाग द्वारा अनुमोदित…

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शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-राज्य के महाविद्यालयों में अध्ययनरत मेधावी छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए चल रही कालीबाई भील व देवनारायण छात्रा स्कूटी योजनाओं के अन्तर्गत स्कूटी वितरण का कार्य अब प्रत्यक्ष लाभान्तरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, डीबीटी) विधि से होगा।

लाभान्वित मेधावी छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए इस प्रक्रिया में स्कूटियों के लिए वित्त विभाग द्वारा अनुमोदित राशि सीधे छात्रा के बैंक खाते में अन्तरित की जाएगी। इससे पूर्व मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरण की प्रारम्भ से अन्त तक की समस्त प्रक्रिया महाविद्यालयों को ही सम्पन्न करनी होती थी, जिसके कारण उन्हें अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (उच्च शिक्षा) लम्बे समय से प्रयासरत था। अन्ततः संगठन के सतत् एवं सुनियोजित प्रयास सफल रहे।संगठन के प्रदेश महामन्त्री प्रो. रिछपाल सिंह ने बताया कि पहले तो महाविद्यालयों को स्कूटी की आपूर्ति ही अत्यधिक विलम्ब से होती थी, जिसके कारण महाविद्यालय प्रशासन को सत्रवार रिकॉर्ड संधारित रखना पड़ता था।

उसके बाद इन स्कूटियों के भण्डारण का संकट खड़ा हो जाता था। स्कूटियों को महाविद्यालयों में इन स्कूटीयों को की कक्षा-कक्षों में रखना पड़ता था, जिनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होती थी। साथ ही इन स्कूटियों के रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया भी महाविद्यालयों को ही पूरी करनी पड़ती थी।

इस सारे अभ्यास में अनेक शिक्षकों व कर्मचारियों को स्कूटी वितरण योजनाओं के सम्पादन में लगाया जाता था। स्कूटीयों के वितरण का यह कार्य वर्षपर्यंत निरंतर चलता था, जिसके कारण नोडल महाविद्यालयों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित होता था

प्रो. रिछपाल सिंह के अनुसार प्रत्यक्ष लाभान्तरण की इस विधि से स्कूटियों की राशि छात्राओं के खाते में जमा करवाने से अब ये समस्याएँ दूर हो जाएँगी और महाविद्यालयों के शैक्षिक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार होगा।

संगठन के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. मनोज बहरवाल ने कहा है कि यह निर्णय शिक्षा व शिक्षक दोनों के ही हित में रहेगा, क्योंकि अब महाविद्यालयों के पास लाभार्थी छात्राओं की पात्रता की जाँच करने व वरीयता सूची बनाने का काम ही रहेगा।

इस सकारात्मक निर्णय के लिए संगठन ने प्रदेश की संवेदनशील सरकार के मुख्यमन्त्री व उच्च शिक्षा मन्त्री का आभार व्यक्त किया है।

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