ई-विकास पोर्टल के बिना उर्वरक बिक्री पर सख्ती, दतिया में 8 विक्रेताओं को नोटिस जारी।

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दतिया। जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा ऐसे उर्वरक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, जो ई-विकास पोर्टल के माध्यम से बिक्री नहीं कर रहे थे।

उपसंचालक कृषि विभाग दतिया द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित निजी उर्वरक विक्रेताओं की जांच की गई,जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर मैसर्स पीताम्बरा पॉलीपेक सेवढ़ा चुंगी दतिया, मैसर्स धाय महादेव ट्रेडर्स बड़ोनी, मैसर्स मनोज कुमार गुप्ता बड़ोनी, मैसर्स महादेव ट्रेडर्स रामपुरा खुर्द, मैसर्स किसान कृषि सेवा केन्द्र इंदरगढ़, मैसर्स मां पीताम्बरा माई खाद बीज भंडार जुझारपुर, मैसर्स दुवेजी खाद बीज विक्रय केन्द्र उदगुवा तथा मैसर्स मां लक्ष्मी खाद बीज भंडार बड़ौनी के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कार्रवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

सभी संबंधित विक्रेताओं को तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके उर्वरक विक्रय लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।

कृषि विभाग ने जिले के समस्त निजी उर्वरक विक्रेताओं को भविष्य के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार सभी प्रकार के उर्वरकों का विक्रय ई-विकास पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना चाहिए तथा इसके साथ पीओएस मशीन का उपयोग भी किया जाए।

यदि कोई विक्रेता केवल पीओएस मशीन से उर्वरक बिक्री करता हुआ पाया जाता है और ई-विकास पोर्टल पर प्रविष्टि नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी, इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को भी उर्वरक वितरण प्रणाली की नियमित और सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि किसी विक्रेता द्वारा अवैध भंडारण, परिवहन, कालाबाजारी, अनियमितता अथवा शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक बिक्री की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई प्रस्तावित की जाए, प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले के किसानों को समय पर, उचित दर पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सके।

इसके लिए उर्वरक वितरण प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी और नियंत्रित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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