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TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) जिला शाहपुरा के तत्वावधान में अतिरिक्त जिला कलेक्ट्रेट, शाहपुरा के समक्ष टीईटी अनिवार्यता के विरोध में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसके उपरांत एडीएम कार्यालय से प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी के साथ उपखंड अधिकारी को प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।…

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) जिला शाहपुरा के तत्वावधान में अतिरिक्त जिला कलेक्ट्रेट, शाहपुरा के समक्ष टीईटी अनिवार्यता के विरोध में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

इसके उपरांत एडीएम कार्यालय से प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी के साथ उपखंड अधिकारी को प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।जिला मीडिया प्रभारी हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि ज्ञापन अजमेर संभाग संगठन मंत्री महेश कुमार शर्मा एवं जिला मंत्री संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में दिया गया।

वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों एवं पात्रताओं के अनुरूप पूर्णतः वैध थीं। बाद में निर्धारित पात्रता अथवा योग्यता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं है। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता एवं योगदान को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता एवं शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा।

संसद एवं केंद्र सरकार आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत हस्तक्षेप कर इस वर्ग को उचित संरक्षण प्रदान कर सकती है। किसी भी पात्रता मानदंड को पूर्व प्रभाव से लागू करने के प्रश्न पर न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के आलोक में पुनर्विचार अपेक्षित है।

महासंघ ने भारत सरकार से मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा-अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा हेतु आवश्यक विधायी, नीतिगत अथवा प्रशासनिक कदम शीघ्र उठाए जाएं।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं

1. 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।

2. ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए।

3. आवश्यकता होने पर संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान की जाए।

4. सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण किया जाए।

महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक वर्ग के साथ न्याय सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार संवेदनशीलता, दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देगी। सैकड़ों की संख्या में शिक्षकों ने उपस्थित रहकर विरोध दर्ज कराया।

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