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सारंगपुर। 400 साल का वनवास खत्म, 3 हिंदू घरों वाले गांव में 41 फीट ऊंचे मंदिर में पधारे खेड़ापति हनुमान

_“बाबा ने ब्राह्मण के बेटे को चुना” – संत समागम में मिले श्री श्री 108 की उपाधि, 13 यजमानों ने संभाला 7 दिवसीय महाअनुष्ठान यह खबर नहीं, इतिहास है। 1200 की आबादी वाले चतरूखेड़ी गांव में जहां आज सिर्फ तीन हिंदू परिवार रहते हैं, वहां 400 वर्षों से खुले आसमान के नीचे विराजमान श्री खेड़ापति…

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_“बाबा ने ब्राह्मण के बेटे को चुना” – संत समागम में मिले श्री श्री 108 की उपाधि,

13 यजमानों ने संभाला 7 दिवसीय महाअनुष्ठान

यह खबर नहीं, इतिहास है।

1200 की आबादी वाले चतरूखेड़ी गांव में जहां आज सिर्फ तीन हिंदू परिवार रहते हैं, वहां 400 वर्षों से खुले आसमान के नीचे विराजमान श्री खेड़ापति हनुमान जी महाराज अब 41 फीट ऊंचे भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित हो गए हैं। सोमवार को हुई प्राण प्रतिष्ठा और 7 दिवसीय महायज्ञ के समापन के बाद यह गांव देशभर के लिए आस्था और भाईचारे की मिसाल बन गया है।

संत समागम में मिली ‘श्री श्री 108’ की उपाधि, बने महंत

इसी श्रृंखला में आयोजित विशेष संत समागम सम्मेलन के दौरान मऊ खेड़ापति हनुमान मंदिर के पुजारी श्री गुरु चरण दास जी महाराज को ‘श्री श्री 108 श्री गुरु चरण दास जी महाराज’ की उपाधि से विभूषित किया गया। संत समाज ने उन्हें चतरूखेड़ी खेड़ापति हनुमान मंदिर का महंत व पुजारी घोषित किया। 8 माह के अन्न-जल त्याग और मंदिर निर्माण के संकल्प को देखते हुए संतों ने यह सम्मान दिया।

पुजारी बोले- “बाबा ने ब्राह्मण के बेटे को चुना”

नवनियुक्त महंत श्री श्री 108 गुरु चरण दास जी महाराज ने भावुक होकर बताया, “400 वर्ष पहले यहां ब्राह्मण लोग निवास करते थे। समय-परिस्थिति के कारण सब विलय हो गए। आज गांव में कोई ब्राह्मण परिवार नहीं है, केवल तीन घर हिंदू परिवार के हैं। हो सकता है बाबा ने ब्राह्मण के बेटे को चुना और मेरे हाथों से यह पुण्य काम कराया। जिसका आसपास के 100 गांव के लोगों ने तन-मन-धन से मेरे संकल्प में साथ दिया।”

12 लाख लाख की लागत से बना 41 फीट ऊंचा शिखर

महंत जी के 8 माह के कठिन संकल्प और मऊ सहित 100 गांवों के सनातन धर्मावलंबियों के सहयोग से 12 लाख की लागत से यह41 फीट ऊंचा भव्य मंदिर तैयार हुआ।

13 यजमानों ने संभाला 7 दिवसीय महाअनुष्ठान

इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधान यजमान के साथ कुल 13 यजमानों ने सेवा दी। प्रधान यजमान रामबाबू राजपूत ने ₹55 हजार 555 की बोली लगाकर समस्त अनुष्ठान संपन्न कराए। इनके साथ 12 अन्य यजमान भी सात दिन तक अनुष्ठान में जुटे रहे!

सोमवार: 2 हजार आंखें हुईं नम

सोमवार को काशी से पधारे विद्वान आचार्यों ने स्थिर लग्न और अभिजित नक्षत्र के दुर्लभ मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा कराई। खेड़ापति सरकार के साथ मां काली, शीतला माता और शिव-पार्वती परिवार की मूर्तियां भी स्थापित हुईं। 2 से 3 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में “जय बजरंगबली” का उद्घोष गूंजा। शिखर कलश स्थापना का सौभाग्य राधेश्याम राजपूत को ₹ 14 हजार रुपए की सेवा देखकर कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त किया

20 से 26 तारीख: 7 दिन चला धर्म का महाकुंभ

प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही 20 तारीख से श्री राम पंचकुंडी महायज्ञ और श्री राम कथा का शुभारंभ हुआ था। मंगलवार को दोपहर 12 बजे महायज्ञ की पूर्ण आहुति और 3 बजे कथा के समापन के दौरान 5 हजार श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

मंगलवार: बाबा का भव्य शृंगार

मंगलवार को मुकेश सिंह भिलाला व हरि सिंह भिलाला धनोरा ने ₹11,000 की बोली लगाकर शृंगार सेवा प्राप्त की। उज्जैन के प्रसिद्ध गोपाल जी शर्मा “भोला गुरु” ने बाबा का अलौकिक शृंगार किया। जहां चंद्र सिंह राजपूत निवासी धनोरा किस हजार रुपए दान देकर प्रथम दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया तत्पश्चात महाआरती की गई

100 गांव बने इस इतिहास के साक्षी

1200 की आबादी वाले इस गांव में हुए आयोजन की गूंज 100 गांवों तक पहुंची। मऊ के युवाओं और आसपास ग्रामीण अंचल के विभिन्न संगठनों ने पूरे 7 दिन तन-मन से व्यवस्थाएं संभालीं।

फोटो कैप्शन: 1. 41 फीट ऊंचा नवनिर्मित खेड़ापति हनुमान मंदिर 2. संत समागम में श्री श्री 108 की उपाधि ग्रहण करते महंत जी 3. महाप्रसादी एवं महाआरती में श्रद्धालुओं की भीड़

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