सेवा ही धर्म है: जयनगर में माँ अन्नपूर्णा का कांवड़ सेवा शिविर
सेवा ही धर्म है: जयनगर में माँ अन्नपूर्णा का कांवड़ सेवा शिविर
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
सावन का महीना आते ही भक्ति के साथ-साथ सेवा का भाव भी जन-जन में जागृत हो जाता है। इसी पावन भावना के साथ मधुबनी जिले के जयनगर में “माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति” ने मानवता की एक नई मिसाल कायम की है। कुंवर सिंह चौक पर आयोजित दो दिवसीय विशाल कांवड़ सेवा शिविर ने यह सिद्ध कर दिया कि भूखे को भोजन और प्यासे को पानी पिलाना ही सबसे बड़ी पूजा है।
पिछले पांच वर्षों से निरंतर चले आ रहे इस शिविर का आयोजन इस वर्ष भी श्रद्धालु दाताओं के सहयोग से पंजाब नेशनल बैंक, कुंवर सिंह चौक के पास किया गया। सावन माह के तीसरे सोमवार के अवसर पर लगाए गए इस शिविर में दूर-दराज से आए हजारों कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की सेवा की गई।
समिति द्वारा निःशुल्क महा प्रसाद की व्यवस्था की गई थी जिसे ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद दिया। भीषण गर्मी के मद्देनजर शुद्ध शीतल पेयजल, लस्सी, प्राथमिक उपचार, विश्राम स्थल और बैठने की समुचित व्यवस्था भी की गई थी। आयोजकों का संकल्प था कि दिन हो या रात, इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी कांवरिया को सहायता के बिना नहीं लौटने दिया जाएगा।
इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। शिविर के पहले दिन उद्घाटन सत्र में स्थानीय चेयरमैन कैलाश पासवान, अनिल बैरोलिया, सूर्यनाथ यादव, राजेश सिंह और ई. धर्मेंद्र यादव उपस्थित रहे। वहीं दूसरे दिन राजनगर विधायक सह प्रदेश अध्यक्ष सुजीत पासवान, जयनगर डीएसपी सदानंद कुमार, जिला पार्षद अंजलि मंडल, पूर्व विधान पार्षद सुमन कुमार महासेठ, सुड़ी युवा शक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रहलाद
पुर्वे और भाजपा जिला मंत्री संजय महतो सहित कई नगर गणमान्य और बुद्धिजीवियों ने शिविर में पहुंचकर न केवल व्यवस्था का जायजा लिया बल्कि स्वयं भी श्रद्धालुओं की सेवा में हाथ बंटाया। माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति के सदस्यों का मानना है कि कांवड़ यात्रियों की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनका कहना है
कि यह सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म है और इसी भावना के साथ वे लगातार समाज सेवा में जुटे रहते हैं। शिविर में काम कर रहे स्वयंसेवकों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि एक अलग तरह का संतोष दिखाई दे रहा था। हर “बोल बम” के जयकारे के साथ उनकी सेवा भावना और प्रबल होती जा रही थी।
समिति ने संकल्प लिया है कि भविष्य में भी इसी तरह के सेवा कार्य जारी रखे जाएंगे। जयनगर का यह कांवड़ सेवा शिविर केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।