भरतगढ़ विद्यालय में आयोजित कृष्ण स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता में बच्चों ने बिखेरा आकर्षण
आज सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरतगढ़ दतिया में “कृष्ण स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता” का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा नर्सरी से लेकर कक्षा पाँच तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि के तौर पर श्री मानवेंद्र सिंह परिहार (पूर्व जिला अध्यक्ष), अनुभव राय (प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन अध्यक्ष), आकाश दुबे (पार्षद, समाजसेवी ), पंचम सिंह जी कौरव (केशव बाल विकास समिति अध्यक्ष), कपिल जी तांबे (प्राचार्य), मंचासीन रहे। अतिथि परिचय दीपक जी शर्मा (इकाई प्रमुख माध्यमिक विभाग) एवं कार्यक्रम की रूपरेखा विद्यालय के प्राचार्य कपिल जी तांबे द्वारा रखी गई।
कृष्ण स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अक्षय श्रीवास्तव नमन गोस्वामी, प्रतिमा भट्ट, प्रियंका शर्मा उपस्थित रहे।छोटे-छोटे बच्चों ने भगवान कृष्ण, राधा, सुदामा और गोप-गोपियों के रूप में मनमोहक सज्जा प्रस्तुत की। उनकी वेशभूषा, भाव-भंगिमा और प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।विद्यालय के प्राचार्य कपिल जी तांबे ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में आत्मविश्वास, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करती हैं। एवं मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा यह कार्यक्रम वास्तव में भावुक कर देने वाला कार्यक्रम है क्योंकि यह छोटे-छोटे बच्चे अपने श्रंगार में साक्षात कृष्ण भगवान लग रहे हैं यह सरस्वती विद्या मंदिर केवल संस्कार देने का काम करते हैं और जो अभिभावक अपने बच्चों को कृष्ण रूप में श्रृंगार करके कर कर लाए हैं वह अपने बच्चों में कृष्ण जैसे गुण उनके आचरण में कैसे लाएं इस पर भी विचार करें क्योंकि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं जिस प्रकार का आचरण आप उनमें डाल दोगे वह वैसे ही ढल जाएंगे । वही आचार्य-दीदीयों के द्वारा दी गई शिक्षा को बच्चे पूरे जीवन भर याद करते हैं एवं यह सारे बच्चे बहुत भाग्यशाली हैं कि उनको ऐसे विद्यालय में पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ है एवं यहां पर बैठे हुए समस्त अभिभावकों से मैं कहना चाहता हूं कि अपने बच्चों में इस प्रकार के संस्कार दें कि वह अपने बड़ों का सम्मान करें तथा ऐसी संगत में भेजें जिससे उन्होंने संस्कारों का विकास हो सके क्योंकि जिस प्रकार से आसमान से जब कोई बूंद गिरती है अगर वह समुद्र में गिरे तो खारी हो जाती है और नीम के पेड़ पर गिरे तो कड़वी हो जाती है और सीप में गिरे तो मोती बन जाती है यह संगत का ही असर है । इस अवसर पर अभिभावकों ने भी बच्चों के उत्साह और प्रतिभा की प्रशंसा की।निर्णायक मंडल द्वारा प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनकी वेशभूषा, अभिनय और प्रस्तुति के आधार पर किया गया। प्रतियोगिता के अंत में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केशव बाल विकास समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह जी कौरव ने की एवं संचालन श्रीमती सीता सक्सेना एवं माध्यमिक की बहनों के द्वारा किया गया ।यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजक रहा, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना।